जोहार छत्तीसगढ़-रायपुर।
दृढ़ इच्छाशक्ति,अथक परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास के बल पर असंभव को संभव बनाया जा सकता है। इस सत्य को चरितार्थ कर दिखाया है केवट समाज की होनहार छात्रा रेशमा केवट ने। लगभग 90 प्रतिशत दिव्यांगता जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा-2026 में 89.75 प्रतिशत अंक अर्जित कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। उनकी इस प्रेरणादायी उपलब्धि पर रायपुर स्थित आरोहण वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित गरिमामय सम्मान समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया।
समारोह में फाउंडेशन के पदाधिकारियों,समाज के वरिष्ठजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में रेशमा का पुष्पगुच्छ,सम्मान-पत्र और स्मृति-चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया। उपस्थित लोगों ने उनकी मेहनत,संघर्ष और उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे पूरे समाज के लिए गौरव का क्षण बताया।
रेशमा केवट भारतीय जनता युवा मोर्चा,जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जिला उपाध्यक्ष एकलव्य केवट की भतीजी हैं। सीमित शारीरिक क्षमता के बावजूद उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। कठिन परिस्थितियों का डटकर सामना करते हुए उन्होंने नियमित अध्ययन,अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और यह साबित कर दिया कि सफलता केवल परिस्थितियों की नहीं,बल्कि संकल्प और मेहनत की मोहताज होती है।
सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रेशमा की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं,बल्कि पूरे केवट समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को रेशमा के संघर्षपूर्ण जीवन से सीख लेकर कठिनाइयों से घबराने के बजाय उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करना चाहिए। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा टिक नहीं सकती।
अतिथियों ने रेशमा के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वह आने वाले समय में शिक्षा सहित जीवन के हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगी और समाज तथा प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगी। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि ऐसे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का सम्मान समाज में सकारात्मक सोच और शिक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने रेशमा की उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सफलता उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है,जो किसी न किसी कठिनाई से जूझ रहे हैं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो,आत्मविश्वास अटूट हो और मेहनत निरंतर हो,तो कोई भी चुनौती सफलता का मार्ग नहीं रोक सकती।
रेशमा केवट की उपलब्धि समाज को यह प्रेरक संदेश देती है कि दिव्यांगता कभी भी प्रतिभा,शिक्षा और सपनों के बीच दीवार नहीं बन सकती। दृढ़ संकल्प,सकारात्मक सोच और निरंतर प्रयास के बल पर हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता का नया इतिहास रच सकता है।








