जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ के भालूपखना गांव में धनवादा कंपनी द्वारा 8 मेगावॉट जल विद्युत परियोजना का काम जोर शोर से चल रहा है। धनवादा कंपनी शुरू से ही विवादों में रहा, ग्रामीणों ने कई बार काम बंद करवा चूका है लेकिन धनवादा कंपनी अपने पैसे के दम पर नियम विरूद्ध हर काम को अंजाम दिया है। वन विभाग के बिना अनुमति के वन भूमि पर निर्माण कार्य करने की शिकायत भी हुआ था, शिकायत की जांच करने बिलासपुर से टीम भी आई थी जांच टीम को जांच में शिकायत सही पाया था, जांच टीम ने जांचकर डीएफओ धरमजयगढ़ को कार्यवाही के लिए जांच प्रतिवेदन सौंप था। विडंबना देखिए कि जांच में सही पाये जाने के बाद भी धनवादा कंपनी के खिलाफ डीएफओ ने अभी तक कोई कार्यवाही नहीं किया है जिसका नतीजा है कि धनवादा कंपनी एकबार फिर अपने पैसे के दम पर बिना अनुमति के वन विभाग के पीएफ 99, 101,102 में बिजली पोल लगा रहे हैं। मजेदार बात है कि इसकी जानकारी रेंजर से लेकर वन मंडला अधिकारी को होने के बाद भी वन विभाग हाथ पे हाथ धरे बैंठे हैं।
क्या कहते हैं रेंजर बाकारूमा
धनवादा कंपनी द्वारा बाकारूमा रेंज के पीफ 99,101 एवं 102 में लग रहे बिजली खम्भा के बारे में जब रेंजर विष्णु प्रसाद मरावी से जानकारी लिया गया कि सर क्या वन विभाग के भूमि में बिजली पोल लगाने की अनुमति धनवादा कंपनी द्वारा लिया गया की नहीं, रेंजर मरावी ने बताया कि नहीं अनुमति की जरूरत नहीं है बिजली खम्भा धनवादा नहीं बिजली विभाग लगा रहे हैं। मैं आपको फोटो भेज रहा हूं आप देख लीजिए पूराना खम्भा हटाकर नया खम्भा लगा रहे हैं। अब आप खुद सोच सकते हैं कि वन विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी को यहा भी मालूम नहीं कि उनके जंगल में कौन बिजली पोल लगा रहे हैं। जबकि वन विभाग में जो बिजली पोल लग रहे हैं वह बिजली विभाग नहीं धनवादा कंपनी के ठेकेदार लगा रहे हैं वन विभाग के बिना अनुमति के।
* धरमजयगढ़ बिजली विभाग के एई कुजूर से जब वन विभाग के भूमि पर लगाये जा रहे बिजली पोल के बारे में जानकारी लिया गया तो उन्होंने बताया कि भालूपखना गांव से बाकारूमा तक जो बिजली पोल लगाया जा रहा है वह बिजली विभाग द्वारा नहीं लगाया जा रहा है, बिजली खम्भा धनवादा कंपनी द्वारा लगवाया जा रहा है। हमारे द्वारा फिर से पूछा गया कि जो बिजली पोल लग रहे हैं उसमें तो आप लोगों का 11 केवी सप्लाई भी दिया जा रहा है तो उन्होंने बताया कि 8 मीटर में 11 केवी और 13 मीटर में धनवादा कंपनी 33 केवी सप्लाई दिया जायेगा।
* ठेकेदार कुलदीप से जानकारी लेने पर बताया कि बिजली पोल का काम मेरे द्वारा किया जा रहा है, पुराने बिजली पोल के पास ही नया पोल लगाया जा रहा है। 8 मीटर में 11 केवी और 13 मीटर में 33 केवी सप्लाई होगा। वन विभाग से अनुमति लिया है कि नहीं मैं नहीं जनता काम का भुगतान धनवादा कंपनी द्वारा किया जायेगा।
* अब आप सोच सकते हैं कि किस कदर धनवादा कंपनी के सामने वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी नतमस्तक हो गये हैं। रेंजर खुद बोल रहे हैं कि हाथी विचरण क्षेत्र है और हाथी विचरण क्षेत्र में बिना अनुमति के बिजली पोल का स्थापना करना कितना सही है ये सोचने की जरूरत है?



