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सत्ता पक्ष के लिए सोने में सुहागन, तीन चार कट्टी तौल कर लगा देते हैं छल्ली.. सरकार का नियम निर्देशों का खुला उल्लंघन… पत्रकारों को मामला पर खबर नहीं लगाने का दिया प्रलोभन

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सत्ता पक्ष के लिए सोने में सुहागन, तीन चार कट्टी तौल कर लगा देते हैं छल्ली.. सरकार का नियम निर्देशों का खुला उल्लंघन… पत्रकारों को मामला पर खबर नहीं लगाने का दिया प्रलोभन

जोहार छत्तीसगढ़ – बेमेतरा।

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर किसानों के व प्रदेश के अन्नदाता किसानों के धान की पाई पाई खरीदने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार तैयार है किंतु कुछ भ्रष्ट प्रबंधकों एवं कर्मचारियों के मिली भगत के चलते किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और सरकार कों बदनाम कर रहा है नतीजा यह है कि समिति प्रबंधक ने अजब गजब का चल रहा कारनामें आपको बता दूं कि बेमेतरा जिले जो खाद्य मंत्री के गृह जिले है जहाँ सेवा सहकारी समिति पर कुछ कर्मचारियों का एक बड़ी लापरवाही देखने कों मिला है पूरी वाक्य समझने का लायक है आपको बता दूं कि प्रभारी समिति प्रबंधक व फड़ प्रभारी के मिलीभगत से बिना धान तौले के वक्त फड़ के अंदर धान पलटी करने के नाम पर हेमाल व मुकदम सहित प्रभारी समिति प्रबंधक कि सहमती से मिली भगत से ₹1500 लेने की बात को स्वीकार की गई वहीं हर प्रभारी तथा मुकदम कि जानकारी इस बात को भी स्वीकार किया कि धान जो है गर्मी फसल की धान है और फड़ प्रभारी ने कहा धान समझ नही आया गर्मी फसल का धान जैसे लगा और मै नया हू मुझे जहां देखने का जानकारी नही कहा गया तो ऐसे लोगों कों फड़ प्रभारी के लिए अधिकारी से लेकर जिम्मेदार कैसे जिम्मेदारी दे देते है और साथ ही प्रबंधक ने बातो कों गोल मोल करते हुवे बताया कि महमाया और सरना धान मिक्सिंग बताई है जिसको धान का जानकारी नही होता है वैसे लोगों कों जिम्मेदारी भी दे दिया जाता है यह मामला सेवा सहकारी समिति मर्यादित पंजीयन क्रमांक 10 29 शाखा खण्डसरा का धान उपार्जन केंद्र ओड़िया का मामला है जहां समिति प्रबंधक एवं फंड प्रभारी सहित मुकदम तथा हेमालों के साथ में मिली भगत करके किसान से अतिरिक्त राशि ₹15 सौ रुपए लेने की बात स्वयं फंड प्रभावित तथा हिमाल मुकदम के द्वारा स्वीकार किया गया। अब बात यह आता है कि समिति पर मुकदम और हेमाल तो लगाए गए हैं लेकिन वही समिति में काम करने वाले हेमाल का पैसा सरकार द्वारा भी दिया जाता है तो आखिर किसान से पैसा लेने की वजह क्यों क्या समिति में अनुबंध नहीं हुआ है क्या उनको धान की अतिरिक्त कमाई के लिए किसान कों भी लुटा जायेगा जिनके लिए जिम्मेदार कोंन है.?

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