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8 दिन से कड़कड़ाती ठंड में डटे ग्रामीण जन सुनवाई निरस्त करने की मांग पर… ग्रामीणों न प्रशासन पर लगाया फर्जी जन सुनवाई करवाने का आरोप… 14 गांव के ग्रामीण जिंदल कोल मांइस गेट के सामने कर रहे आंदोलन, शासन-प्रशासन मौन ग्रामीणों आक्रोश

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

रायगढ़ जिले के तमनार में 8 अगस्त को जिंदल कोयला खदान का जन सुनवाई नियम कानून को ताक में रखकर प्रशासन द्वारा करवाया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन एवं जिंदल कंपनी के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा मिली भगत कर फर्जी तरीके से जन सुनवाई करवाया गया है। जिला प्रशासन जहां जन सुनवाई का स्थल चयन किया गया था वहां जन सुनवाई न करवाकर एक कमरे में 8-10 लोगों को अपने पक्ष में कर जन सुनवाई घंटे में ही समाप्त कर दिया गया है जो नियम विरूद्ध है। प्रशासन द्वारा कराये गये जन सुनवाई की जानकारी ग्रामीणों को लगते ही ग्रामीणों में जबदस्त आक्रोश फैल गया। प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंकते हुए अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैंठ गये। 14 गांव के महिला-पुरूष, बच्चे, बुढ़़े सभी एक स्वर में विरोध दर्ज करवाते हुए आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशसन द्वारा करवाये गये जन सुनवाई को फर्जी जन सुनवाई घोषित करते हुए जन सुनवाई को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का शासन से मांग है कि फर्जी जन सुनवाई करवाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों पर भी कार्यवाही करें जब तक ग्रामीणों की मांग के अनुरूप शासन कार्यवाही नहीं करेंगे तब तक आंदोलन चलता ही रहेगा। विडंबना देखिए कि किस कदर शासन-प्रशासन ग्रामीणों के साथ अन्याय कर रहे हैं, दिसंबर माह की कड़कड़ाती ठंडे में ग्रामीणों छोटे-छोटे बच्चों को लेकर टेंट के नीचे आज 8 दिन से आंदोलन कर रहे हैं और इसके आंदोलन को समाप्त करवाने का अभी तक कोई पहल नहीं हुआ। छोटी-छोटी बातों पर राजनीति करने वाले भी ग्रामीणों से दूरी बनाए हुए हैं, ग्रामीणों के आंसु पोछने वाला कोई नहीं है, सब अपने आप में मस्त नजर आ रहे हैं? आंदोलन स्थल पर सुनने को मिल रहा था कि आज कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दपक बेज ग्रामीणों से मिलने तमनार आने वाले हैं।

आंदोलन स्थल में नहीं दिखे पर्यावरण प्रेमी?

जिले के कुछ तथा कथित पर्यावरण प्रेमी जो कंपनी के हर जन सुनवाई का विरोध करने पहुंच जाते हैं और ग्रामीणों को बड़ा-बड़ा भाषण देते हुए जन सुनवाई का विरोध करने के लिए एक करते हैं ऐसे एक भी पर्यावरण प्रेमी ग्रामीणों के आंदोलन स्थल पर नजर नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों को पेशा कानून की जानकारी देने वाले आंदोलनकारी तमनार के ग्रामीणों के साथ क्यों खड़े नहीं है? क्या जिंदल का नाम सुनते ही इनको सांप सुंघ गया है या और कोई और बात है जो सार्वजनिक नहीं किया जा सकता है?

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