जोहार छतीसगढ़-बेमेतरा।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में लगातार एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों के वजह से आम नागरिकों को राजनीतिक द्वेष की भावना देखने को मिलता है। वही आम नागरिकों को भी राजनीतिक चश्मे के नजरिए से देखकर सरकारी कर्मचारी का हौसला बुलंद रहते हंै इसी वजह से केंद्र तथा राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं से जनता को वंचित होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है की एक ही स्थान पर लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के हौसले और पहचान बढऩे के वजह से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है और उक्त कर्मचारियों की उच्च स्तरीय अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने पर राजनीतिक सत्ता में बैठे लोगों के वजह से ही उचित कार्यवाही नहीं होती नतिजन भ्रष्टाचार चरम सीमा बढ़ रही है। जिनके वजह से अवैध कार्यों को बढ़ावा और शिकायतकर्ताओं का नाम को जगजाहिर करके उनको सरेआम व्यक्तिगत दुश्मनी पैदा करवा रहे हैं। गौरतलब हो की कई सालों से एक ही स्थान में जमे कर्मचारियों पर कार्यवाही करने के बजाय उनसे कमीशन का खेल कर आम नागरिकों के हक अधिकार पर डाका डालने का कार्य तो नहीं चल रहा है।
खाद्य विभाग के निरीक्षकों पर उठ रहे गंभीर सवाल
खाद्य विभाग के आला अधिकारी अपने कर्मचारियों से ही पस्त है ऐसा लगता है की मानो जिले की पूरी कमान खाद्य निरीक्षक ही सम्भाल रहे हैं। साथ ही किसी अवैध गतिविधियों की सूचना देने पर शिकायत नहीं मिला कहकर कार्यवाही करने से बचते हैं। यहा एक सवाल उत्पन्न होता है की आखिर क्यों जिम्मेदार को अवैध गतिविधियां दिखाई नहीं देता या दिखाई देता है तो कार्यवाही क्यों नहीं? इसमे कई प्रकार का सवाल उठ रहा हैं। क्या जिम्मेदार कर्मचारी को शिकायत मिलेगा तभी कार्यवाही करेंगे? और शिकायत उसके आंखों के सामने कुछ गैर सरकारी अवैध कारोबार होगा तो उन पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं करना व कोई सूचना दे तो उनका शिकायत नहीं मिलने की बात आखिर क्यों आता है इस बात से सिर्फ बंद लिफाफे में मलाई मिठाई की मिठास में सभी भ्रष्टाचार ढूंब तो नहीं चूका है। तभी तो ना कार्यवाही और न ही जिम्मेदारी पद पर बैठे जिम्मेदार कर्मचारी मौके में नहीं पहुंचते और सिर्फ कुर्सी पर बैठकर ही पूरी निगरानी हो जाता है। बेमेतरा जिले के कई गांवों में व खाद्य मंत्री के निज विधानसभा क्षेत्र में चावल का हेरा-फेरी होने के बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है। यह एक बड़ी सवाल है और नतीजन यह भी है कि दो-दो माह का चावल लेने से ग्रामीण वंचित हो जाते है तो लापरवाह जिम्मेदार कर्मचारियों को बचाने का संरक्षण कौन दे रहा है यह एक बड़ा सवाल है, क्या इसकी जानकारी खाद्य निरीक्षक को नहीं रहता है क्या, पूरी जानकारी नहीं हो पाता ऐसे दफ्तर पर कुर्सी में बैठ कर ही निगरानी कर लेते हैं क्या यह पूरा वाक्य बेमेतरा जिले का विधानसभा क्षेत्र का है जहां पर ग्रामीण को कलेक्टर ऑफिस आकर के अपनी पीड़ाओं को अधिकारी के सामने बयान करना पड़ता है यह एक बड़ा सवाल है खाद्य विभाग के आला अधिकारियों के ऊपर एक बड़ा प्रश्न उठ रहा है खाद्य मंत्री के जिले में खाद्य चावल एवं अन्य खाद्य सामग्रियों के लिए आखिर दर-दर भटकने को क्यों मजबूर हो रहे ग्रामीण? इस वाक्यों को जानने के बावजूद भी अधिकारी सुध लेने के बजाय गंभीर नींद में चले जाते हैं। क्योंकि अब तक उचित मुल्य की दुकानों पर खाद्यान्न सामग्रियों की शॉर्टेज आखिर क्यों है? चावल, मिट्टी तेल, शक्कर की कमी उचित मूल्य की दुकानों पर क्यों हुआ, उक्त जिम्मेदार लोगों को किसका संरक्षण मिल रहा है? विभागीय अधिकारियों को जानकारी अपने विभाग का नहीं रहता है अधिकारी-कर्मचारियों चावल का शाटेज का वसूली और कार्यवाही क्यों नहीं कर पा रहा हैं? क्या सिर्फ अपनी ड्यूटी को बड़ी ही राहत से कार्य कर लेना चाहते हैं और सरकार को लाखों का नुकसान पहुंचाना चाह रहे हंै वही जिम्मेदार विभागीय अधिकारी जांच के नाम सिर्फ दिखावटी नोटिस भेजकर मलाई मिठाई लेकर फाईल आगे बड़ा देने को ही अपनी जिम्मेदारी समझते तो नहीं है यह एक बड़ी सवाल है? और कार्यवाही करने पर जिम्मेदार अफसरों के हाथ पांव फूल क्यों रहे हैं। नतीजन भ्रष्टाचार बेलगाम हो गए हैं स्थानीय मंत्री की छवि खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे जिला के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी और सरकार की अच्छे पहल को जनता के बीच बदनाम करने में तो नहीं लगे हंै एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार जनता कि हित में कार्य किया जा रहा है और देखा जाये तो जिम्मेदारी के पद पर बैठे अधिकारी अपने जिम्मेदारी का पालन नहीं कर पा रहे हंै।
* बेमेतरा जिला में 4 सौ 29 सरकारी उचित मूल्य की दुकानें हैं। खाद्यान्न विधिवत तरीके से सभी दुकानों में पहुंच रही हैं। और उपभोक्ताओं को प्राप्त हो रहा है। यदि उपभोक्ता चावल को बेच रहे हैं। तो ऐसा किसी का भी शिकायत हमारे पास नहीं आया है और आपके द्वारा सूचना प्राप्त हो रहा है जांच कर उचित कानूनी कार्यवाही करेंगे।
ओमकार सिंह ठाकुर, जिला खाद्य अधिकारी बेमेतरा,



