जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ विकास खण्ड के भालूपखना गांव में निर्माण हो रहे जल विद्युत परियोजना में कंपनी वालों ने नियम कानून को ताक में रखकर निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं, ग्रामीणों की लाख विरोध के बाद भी कंपनी वालों ने दादागिरी करते हुए निर्माण कार्य किया जा रहा है। धनवादा कंपनी की दादागिरी के आगे वन विभाग भी नतमस्तक होते दिखाई दिया है और दे भी रहा है। धनवादा कंपनी अपना पॉवर हाउस जिस भूमि पर स्थापित किया जा रहा है वह जगह वन विभाग का है और वन विभाग ने धनवादा कंपनी को किसी भी प्रकार का निर्माण करने का अनुमति नहीं दिया है, वन विभाग के बिना अनुमति के धनवादा कंपनी पूरी निर्माण कर ले रहे हैं और वन विभाग है कि उनके कानों में जुंह तक नहीं रेंग रही है। कोई ग्रामीण अगर घर के लिए एक छोटा सा पेड़ काट ले तो वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इतने मुश्तैदी के साथ कार्यवाही करते हैं जैसे इनको अपने जंगला का बहुत चिंता है, अगर इतना ही चिंता होता तो आज धनवादा कंपनी बिना अनुमति के वन विभाग के जमीन पर इतना बड़ा प्रोजेक्ट नहीं लगा पता। हां वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को चिंता तो है कि किसी तरह से अपना फायदा हो चाहे इसके लिए जंगल बर्बाद ही क्यों न हो जाये? और हो भी रहा है वैसा, जिसका उदाहरण है भालूपखना गांव में स्थापित हो रहे धनवादा पॉवर प्लांट।
शिकायत पर जांच में आये थे सीसीएफ की टीम
धनवादा कंपनी द्वारा बिना अनुमति के वन विभाग की भूमि पर निर्माण करने की शिकायत करने पर बिलासपुर की टीम जांच करने भालुपखना गांव आये थे शिकायतकर्ता की जांच सही पाया। जांच के बाद तात्कालिन डीएफओ अभिषेख जोगावत ने शिकायत कर्ता को बताया गया था कि धनवादा कंपनी पर भारी भरकम पैनल्टी लगेगा। लेकिन जांच हुए सालों हो गया है न तो धनवादा कंपनी पर कोई पैनल्टी लगा और न ही काम पर कोई रोक लगा, कंपनी वालों ने उसी गति से काम करता रहा जिस गति से काम कर रहे थे। धनवादा का काम आज पूरा होने के कागर पर है और वन विभाग जांच का फाइल अपने कार्यालय में रखकर शोभा बड़ा रहे हैं। और भी मजेदार बात है कि वर्तमान डीएफओ जितेन्द्र उपाध्य से धनवादा की प्रकरण पर बात करने पर उन्होंने बताया कि फाईल को अभी साइड में कर रखा हूं।
फिर बिना अनुमति के काम को अंजाम देने को तैयार है धनवाद?
धनवादा कंपनी द्वारा एक बार फिर शासन के नियम कानून को धत्ता बताते हुए वन विभाग के जंगल में खम्भा खड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं। हम आपको बता दे कि धनवादा अपना बिजली बाकारूमा सब स्टेशन को सप्लाई देंगे इसके लिए कंपनी वालों ने तैयारी कर रहे है बाकारूमा सब स्टेशन के पास कंपनी द्वारा काम भी शुरू कर दिया है जिस पर पंचायत द्वारा आपत्ति भी लगाया गया है। तो वहीं भालुपखना से बाकारूमा की दूरी लगभग 4-5 किलोमीटर है और पूरी तरह वन विभाग का जंगल है जहां बिजली खम्भा लगना है, धनवादा कंपनी खम्भा लगाने का भी अनुमति वन विभाग से नहीं लिया है। अब देखना है कि जिस तरह से बिना अनुमति के भालूपखना में निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया है उसी अंदाज में बाकारूमा तक भी बिजला खम्भा लगाने का काम करेंगा या फिर अनुमति लेंगे ये तो बहुत जल्द पता चल जायेगा।



