जोहार छत्तीसगढ़-तिल्दा।
विकासखंड तिल्दा के ग्राम पंचायत परसदा में एक बार फिर पंचायत व्यवस्था और ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। मामला नंदन स्मल्टर्स नामक एक निजी उद्योग को मिली फर्जी एनओसी से जुड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि पं
चायत की आधिकारिक प्रक्रिया और नियमों की अनदेखी करते हुए लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि को उद्योग के लिए आवंटित कर दिया गया।
फर्जी दस्तावेजों से बनी एनओसी
ग्रामीणों का आरोप है कि न तो इस विषय पर ग्रामसभा बुलाई गई और न ही पंचायत की रजिस्टर में कोई प्रस्ताव दर्ज किया गया। बावजूद इसके, विभाग को फर्जी दस्तावेज और हस्ताक्षरों के आधार पर एनओसी भेजी गई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की आधिकारिक प्रक्रिया को दरकिनार कर निजी स्वार्थ के लिए पूरे गांव की कृषि भूमि और जलस्रोतों के साथ खिलवाड़ किया गया।
खेती योग्य भूमि पर उद्योग का निर्माण
विवादित भूमि पहले से ही खेती के लिए आरक्षित थी। ग्रामीणों ने बताया कि इस भूमि पर धान और अन्य फसलें बोई जाती रही हैं, लेकिन अब उद्योग लगाने से न केवल किसानों की जीविका प्रभावित होगी बल्कि पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ेगा। इसके अलावा तालाब और पानी की टंकी की जमीन पर भी उद्योग का निर्माण होने की बात सामने आई है, जिससे भविष्य में जल संकट खड़ा होना तय है।
ग्रामीणों में गुस्सा,आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फर्जी एनओसी को तत्काल रद्द किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
ग्रामीणों का कहना
हमारी उपजाऊ भूमि और जलस्रोत पर कब्जा कर उद्योग को अनुमति देना हमारे अस्तित्व पर हमला है। जब तक यह निर्णय वापस नहीं लिया जाता, हम शांत नहीं बैठेंगे।
पंचायत व्यवस्था पर सवाल
इस पूरे प्रकरण ने पंचायत व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम सभा की अनुमति के बिना और बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव के उद्योग को अनुमति मिलना सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और उद्योग प्रबंधन के बीच सांठगांठ कर यह पूरा खेल रचा गया है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और शासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि दोषियों की पहचान कर कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह से किसी भी गांव की कृषि भूमि और संसाधनों का दुरुपयोग न हो सके। ग्राम परसदा का यह विवाद अब ग्रामीणों के गुस्से और आक्रोश के कारण बड़े आंदोलन का रूप लेने की ओर बढ़ रहा है। यदि प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।



