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गौठान में तब्दील हुआ सरकार की जल जीवन मिशन योजना, जल जीवन मिशन की पानी टंकी बना मवेशियों के लिए गौठान, किसानों की समस्या पर मवेशियों के लिए अनोखा समाधान

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जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता होता है वह फसल नुकसानी को कैसे बचाए इस बात को लेकर ग्रामीण किसान जो घुमंतू प्रवृत्ति के जो मवेशी है उनको एकत्रित करके लगभग डेढ़ सौ की संख्या में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई टंकी के आहता के अंतर्गत रख कर सुरक्षित फसल को करने के लिए कामयाब तो हो गये किंतु एक बड़ा समस्या यह है कि उक्त मवेशियों को पहले दाना और पानी की व्यवस्था कैसे करेंगे हालांकि मवेशी फसलों को बड़ा नुकसान पहुंचता है उसके पीछे का रहस्य क्या है। एक सबसे बड़ी लापरवाही है कि अपने मवेशी को जब दुधारू रहता है उस दौरान में वह अपने घर पर रखते हैं और जैसे ही मवेशी दूध देना छोड़ देता है उसके बाद उनको खुला स्वतंत्र रूप से छोड़ देते हैं । कुछ लोगों का मानना है कि मवेशी रखने से कामकाज में नुकसान होता है दूध सबको चाहिए मक्खन सबको चाहिए किंतु पालने के लिए कोई तैयार नहीं है आखिरकार लोगों को स्वास्थ्य की बदहाल स्थिति को भी झेलते हैं। नतीजन केमिकल युक्त दूध का प्रयोग करते हैं घी का प्रयोग करते हैं मक्खन का प्रयोग करते हैं बल्कि स्वयं उसके घर में गाय रहते भी जिससे उसको दूध मक्खन घी इत्यादि प्राप्त होते हैं किंतु मवेशियों को घर में सेवा जतन करने के बजाय उनको आवारा बना दिया जाता है नतीजा लोग अपनी समस्याओं से कम गांव की उनकी आत्मा को तड़पा करके जिस तरीके से लोग अपनी गुलछर्रे उड़ा रहे हैं वह रोग शोक और दलिद्रता बनकर वापस उन्हीं लोगों को मिलता है।उन्हीं की समस्या को लोग झेल रहे हैं। पूरिवर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए गौठान के लिए सुविधा मुहैया कराया था किंतु सत्ता परिवर्तन होने के बाद आज गौठान की जो परिदृश्य है वह गुमनाम हो चुका है नतीजा आज सड़कों पर आपको खुलेआम मवेशी मंडराते दिखेंगे और हर गांव में मिल जाएगा। नतिजन किसानों की फसल चौपट करते दिखेंगे और क्यों ना हो जब मवेशी पालक स्वयं अपने मवेशी को खुला छोड़ दिए हैं तो नुकसान तो संभव ही है। इसी बात को लोग यदि समझ जाए तो मवेशी घर में रहेंगे और किसी की फसल नुकसानी नहीं होगी। एक ओर जल जीवन मिशन को जिसके तहत बनाए गए पानी टंकी सिर्फ महज एक दिखावे के रूप में प्रतीत हो रहा है इस गतिविधियों को नकारा नहीं जा सकता सरकार की इसमें नाकामी और जिम्मेदार अफसर हैं उसकी साथ-साथ ठेकेदारों की लापरवाही और मनमानी का मंजर देखा जा सकता है इस कदर भ्रष्टाचार से निर्माण किया गया है कि पानी के का लेवल गांव के अंतिम छोर तक पहुंचने से पहले ही पानी टंकी बनने के बाद अपनी दम तोड़ दी है कहीं दरारे पड़े हैं कहीं का पानी टंकी गौठान के रूप में तब्दील हो गया है यह पूरा वाक्य नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत के आने वाले ग्राम पंचायत मूलमुला का मामला देखने को मिला है जब हमारे संवाददाता ने मौके पर जाकर देखा तो जल जीवन मिशन के अंतर्गत बनाए गए पानी टंकी के अंदर लगभग डेढ़ सौ की संख्या में मवेशियों को एकत्र कर ठूस ठूस कर रख दिया गया है जहां और जो बरसाती पानी था वह पानी में मेड्रिड हुए मवेशियों का यह दृश्य देखकर हैरान हो गए इस विषय को लेकर चर्चा किया तो ग्रामीणों का कहना है कि मवेशी फसल की नुकसानी करता था नतीजा उनको व्यवस्थित तरीका से करने के लिए ग्रामीणों ने एकमत होकर के उसे मवेशी को पड़कर के इसमें जल मिशन से बने पानी टंकी के बॉडरी के अंदर डाला गया है।

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