जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मनमानी की खबरें आए दिन देखने और सुनने को मिलता है जहां यह खबरें बेमेतरा जिला के नवागढ़ विकासखंड अंतर्गत आने वाले शासकीय आदर्श प्राथमिक पाठशाला घठोली के शिक्षकों ने तो पूरे सरकारी रिकॉर्ड ही तोड दिए जहां शासकीय प्राथमिक शाला घठोली के प्रधान पाठक और शिक्षिका व एल बी शिक्षकों की मनमानी की खबर सामने आई है, जहां शिक्षक समय से पहले स्कूल छोड़ देते हैं और उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कर जाते हैं। यह तो होता ही आ रहा है इस पर बात करना अपने सिर पर पत्थर मारने वाली बात है।
नौकरानी से कम नहीं समझते सरकारी स्कूलों के शिक्षक बच्चों से करवाते हैं अपने जुठे टिफिन साफ
सरकारी स्कूलों के शिक्षक, शिक्षिका ने गरीब तबके के बच्चों को अपना नौकर से कम नहीं समझते करवाते है साफ सफाई क्योंकि कोई बोलने वाले नहीं जिम्मेदार अफसर को कुर्सी से उठने की फुर्सत नहीं, वहीं अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में अच्छी शिक्षा दिलवा रहे हैं वही गरीब तबके के बच्चों से नौकरानी जैसा व्यवहार करने को अपनी गुरु शिष्य की परम्परा कहने लगते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार लाख दावे कर लें सरकारी स्कूलों को बेहतर करने की किन्तु सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों की शिक्षकों की वास्तविकता से छुप नहीं सकते बुनियादी शिक्षा की बात करें किन्तु हकिकत तो मीडिया के नजरों से छुप नहीं सकता क्योंकि शिक्षकों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए नित नए नए नियम लागू करते हैं किंतु जमीनी धरातल पर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देती है। नतिजन लापरवाही मनमानी और स्कूलों बच्चों पर नौकरशाही का रौब चलाते हैं लेकिन अपने बच्चों को जान का टुकड़ा समझते हैं इस तरह की कपट कब तक चलेगा जिम्मेदारों को इस विषय पर सवाल खड़ा करना चाहिए और शासन प्रशासन को सवाल उठाना चाहिए ताकि गरीब तबके के मजदूर के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिले साथ ही नौकर जैसा सलुक करने वाले पर शक्ति से कार्यवाही करवाए इस तरह की शिक्षकों की मनमानी की खबरों से पता चलता है कि शिक्षकों की मनमानी एक गंभीर मुद्दा है, जिस पर शिक्षा विभाग को कार्रवाई करनी चाहिए ना की उस पर पर्दा डालकर बचाकर उनके करतूतों को ढकने का कार्य ना करें।
* पूर्व शिक्षा अधिकारी ने मिडिया को स्कूलों में प्रवेश वर्जित करने का आदेश का अब हो रहा असर क्यों मिडिया के कैमरे पर शिक्षा विभाग की मनमानी लापरवाही और नौकरशाही का पोल खुली तो आदेश और निर्देश की झुठी सहारा लेकर मिडिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है जो देश के लिए बढ़ा ही दुर्भाग्य का विषय है।



