जोहार छत्तीसगढ़ -बेमेतरा।
झाल के एक स्कूल में एक अनोखी कहानी सामने आई है, जिसमें शिक्षकों ने बच्चों की उपस्थिति के बिना ही मध्यान्ह भोजन खिला दिया गया । हैरानी की बात यह है कि शिक्षकों के पास बच्चों की उपस्थिति की जानकारी नहीं थी, इसके बावजूद भी मध्यान्ह भोजन खिलाया जा रहा था। मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन समुह को लाभ दिलाने का मामला स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
क्या यह सही है?
क्या यह सही है कि शिक्षकों ने बच्चों की उपस्थिति के बिना ही मध्यान्ह भोजन खिलाया? यह एक बड़ी चिंता का विषय है। इस दौरान यदि किसी बच्चे के साथ अप्रिय घटना हो जाए तो क्या इसकी सुरक्षा की जिम्मा लेंगे।
कार्रवाई की मांग
इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए और स्कूल प्रशासन को निर्देश देने चाहिए कि वे बच्चों की उपस्थिति की जानकारी रखें और मध्यान्ह भोजन के लिए आवश्यक व्यवस्था करें। जिला प्रशासन को इस मामले पर गम्भीरता से काम करनी चाहिए। ताकी इस तरह की लापरवाही नहीं हो।
बच्चों के भविष्य का सवाल
बच्चों के भविष्य में दांव लगाकर जिस तरह शिक्षक ने लापरवाही बरती व कतई छोड़ने लायक नहीं है स्कूल में बच्चों की सुरक्षा का सवाल वर्तमान में पालक पूरी तरह स्कूल प्रवेश करने के बाद तथा स्कुल परिसर में आने के बाद छुट्टी होते तक स्कूल में शिक्षकों का जिम्मा लेना ही पड़ेगा वहीं छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले अंतर्गत आने वाले नवागढ़ शैक्षणिक विकास खंड के महज पांच किलोमीटर दूर पर स्थित स्कुल झाल में शिक्षक की लापरवाही काफी संवेदनशील है और इस तरह स्कूल में बच्चों को बगैर उपस्थिति लिए बच्चे आप पास चले जा रहे जो स्कुल के जिम्मेदार अफसर को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहा है। वहीं पढ़ाई और मध्यान्ह भोजन की स्थिति सुधारनी चाहिए ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण मिल सके।



