जोहार छत्तीसगढ़-रतनपुर।
धान का कटोरा के नाम से चिन्हारी हमारा प्रदेश अपनी रीति-रिवाज, तीज-त्यौहारों, फसलों के लिए जाने जाता है। फसलों का त्यौहार हरेली से शुरू होकर छेरछेरा तक चलता है। जहां हरेली में चहूंओर हरियाली होती है, खेत-खलिहान धान के फसलों से समृद्ध होने का आभास दिलाते रहते हैं, वहीं छेरछेरा में फसलों को कटाई मिसाई कर घर में लाकर सभी जनों को धन-धान्य से परिपूर्ण होने का शुभकामनाएं प्रेषित करते हुये धान का दान करते हैं। इसी अवधारणा को स्पष्ट करने शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने छत्तीसगढ़ का अन्नदान का परब छेरछेरा समग्र शिक्षा तिलकडीह के स्कूलो बच्चों व पालकों के साथ पूरे गांव में छत्तीसगढ़ी लोक परिधान में सुसज्जित होकर साथ बाजा-गाजा के साथ घर-घर छेरछेरा मांग कर छेरछेरा का त्यौहार मनाया,गांव में पालकों ने बच्चों के उत्साह व नृत्य से प्रसन्न हो कर जलपान की व्यवस्था की थी। चाय बिस्किट, पकोड़े व चटनी, बड़ा,समोसे, आदि खिलाया। गांव के पालक रामजी पोर्ते ने सभी बच्चों को खाने का न्यौता दिया,और स्वादिष्ट भोजन कराया। इस त्यौहार को मनाने का तात्पर्य इस त्यौहार के प्रति समझ विकसित करना है,अपनी संस्कृति की रक्षा करना, तथा त्यौहारों को नशा से जोड़ कर दूषित कर रहे प्रथा को स्वस्थ, समृद्ध,परिष्कृत,परिमार्जित रुप प्रस्तुत कर बच्चों को सिखाने का उद्देश्य है।



