जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
बीजापुर में हुए पत्रकार हत्याकांड में प्रदेश भर के कोने-कोने पर पत्रकारों द्वारा कैंडल मार्च निकालकर पत्रकार को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। तो वही एक तरफ पत्रकार ने पत्रकार को ही झूठी केस में फसा देने का षड्यंत्र रचते हैं सलाह देते हंै कुछ वरिष्ठ पत्रकार और एक मत होकर कार्य करने की झुठी बात करते हैं पत्रकार एकजुटता की बात करते हंै साथ ही एक मजबूत पायदान बनाने की झूठी छाती ठोकने वाले गद्दार और बेईमान लोग ही पत्रकारों को साबित करने के लिए सिर्फ कैंडल और ज्ञापन सौप कर अपने आप को बुद्धिजीवी मानने वाले पत्रकार गोबर जीवी हो गए हैं। साथ ही कुछ हमारे पत्रकार साथियों को खबर पढ़कर सुनकर अचरज और अचंभित लगेगा मगर यह कटु सत्य है जिसे बर्दाश्त नहीं कर सकेंगे इन हकीकत बातों को लेकर एक बार गंभीर होना पड़ेगा और इस बातों को लेकर कुछ पत्रकार जो अपने आप को बुद्धिजीवी कहने वाले इस बात को गौर फरमाएं क्योंकि कहीं ना कहीं खबर को पढ़कर कुछ बुद्धजीवीयों के मन में द्वेष की भावना बढ़ जाऐगा। बेमेतरा जिले में ही ऐसे ही वाक्या लगातार चल रही है एक पत्रकार जब किसी बातों को निष्पक्ष होकर पारदर्शी तरीके से कार्रवाई कराने की बात करते हैं तो कोई दूसरी तरफ से पत्रकार ही द्वारा पत्रकारों को ही षडयंत्र पूर्वक फंसाने की साजिश रचना शुरू कर देते हैं। यह मामला यहां तक ही नहीं बल्कि मामला उग्र हो जाता है और कहने लग जाते हैं कि उसको लूटपाट के मामले में फसा कर अंदर करा दो। सलाह मशवरा देते हैं हकीकत सबको कड़वा लगता है और बर्दाश्त नहीं कर पाना एक बड़ा सवाल उठाता है। घर में बैठे रहते हैं और पत्रकारिता की आड़ में अपनी रोटी सेकने वाले पत्रकार लोग ही अपने आप को वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं और जो जमीनी धरातल पर जाकर खबरें आम नागरिकों की उनकी पीड़ाओं को जब व्यक्त करते हैं तो वह उनके नजर में गुनहगार साबित हो जाते हैं। बिना सोचे समझे किसी को भी कुछ भी कह देने की आजादी ऐसे पत्रकारों को है जिनको मामले की ए बी सी डी की जानकारी ही नहीं रहता वे मामले पर हस्तक्षेप करते रहते हंै और खुद तो पाप के तवे पर रोटी खाते हंै और वही दूसरे तरफ खोजी पत्रकारों को झुठी मामले पर फंसा देने की बात करते हैं।



