भोपाल । भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को कांग्रेस की ओर से खंडवा लोकसभा सीट से चुनाव लडऩे की चुनौती दी गई है। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि अगर विजयवर्गीय में दम है तो वे खंडवा से उप चुनाव लड़कर दिखाए। वर्मा ने दावा भी किया कि भाजपा कुछ भी कर ले वहां से जीतेगी तो कांग्रेस ही। गौरतलब है कि नंदकुमारसिंह चौहान के निधन के बाद खंडवा सीट खाली हुई है और अब नया सांसद चुनने के लिए उपचुनाव होना है।
उल्लेखनीय है कि भाजपा महासचिव विजयवर्गीय और सज्जन वर्मा की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। अक्सर दोनों एक-दूसरे के खिलाफ बयानों के तीर चलाते रहे हैं। कांग्रेस की ओर से खंडवा सीट से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव का चुनाव लडऩा तय माना जा रहा है। विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला पहले खंडवा में चुनाव प्रभारी रह चुके हैं। कांग्रेस की चुनौती के बाद उपचुनाव में मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है।
इन नेताओं के नामों पर चर्चा
खंडवा लोकसभा सीट के लिए चुनाव आयोग ने भले ही अब तक तारीख निर्धारित नहीं की हो लेकिन क्षेत्र में दोनों पार्टियों के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। साल 1980 से यानी 41 साल बाद इस सीट पर एक बार फिर उपचुनाव की स्थिति बनी है। यहां कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के दावेदार अपने-अपने मतदाताओं को लुभाने में जुट गए हैं। यहां अभी किसी भी पार्टी ने अपने संभावित नेताओं के नाम नहीं बताए हैं। वहीं सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अरुण यादव के नाम के कयास लगाए जा रहे हैं। यादव खुद भी इस सीट से अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। यादव ने इस क्षेत्र में अघोषित प्रत्याशी के तौर पर चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है। हालांकि अरुण को 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। सूत्रों की मानें तो भाजपा के पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री कृष्णमुरारी मोघे और पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के नामों पर चर्चा तेज है। वहीं कैलाश विजयवर्गीय भी चुनाव लडऩा चाहते हैं।
खंडवा लोकसभा सीट का गणित
दरअसल, खंडवा लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं। इसमें खंडवा, बुरहानपुर, नेपानगर, पंधाना, मांधाता, बड़वाह, भीकनगांव और बागली शामिल है। इन 8 विधानसभा सीटों में से 3 पर भाजपा, 4 पर कांग्रेस और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी का कब्जा है। 1980 के बाद यहां पहली बार उपचुनाव कराए जाएंगे। इससे पहले 1979 में यहां उपचुनाव कराया गया था। जिसमें जनता पार्टी के कुशाभाऊ ठाकरे ने कांग्रेस के एसएन ठाकुर को हराया था।
क्या है इस सीट का इतिहास
इस सीट से सबसे ज्यादा भाजपा के नंदकुमार सिंह चौहान जीतने वाले सांसद हैं। यहां की जनता ने उन्हें 6 बार चुनकर संसद तक पहुंचाया था। खंडवा लोकसभा सीट पर सबसे पहला चुनाव साल 1962 में हुआ था। जिसमें कांग्रेस के महेश दत्ता ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 1967 और 1971 में भी कांग्रेस ने कब्जा जमाए रखा। लेकिन साल 1977 में भारतीय लोकदल ने इस सीट पर कांग्रेस को हरा दिया। 1980 में कांग्रेस ने फिर से वापसी की और शिवकुमार सिंह सांसद बनें। आगला चुनाव भी कांग्रेस ने ही जीता। पहली बार इस सीट पर 1989 में भाजपा ने जीत हासिल की। हालांकि भाजपा ज्यादा दिनों तक यहां टिक नहीं पाई और साल 1991 में कांग्रेस ने फिर से इस सीट पर अपना कब्जा जमा लिया।


