भोपाल । केंद्र द्वारा दी गई व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश में देश के विभिन्न राज्यों से आक्सीजन भेजी जा रही है। लिहाजा, बीच में किसी तरह की बाधा न उत्पन्न होने पाए। विभिन्न राज्यों में स्थानीय प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि मध्य प्रदेश भेजी जा रही आक्सीजन के परिवहन के दौरान यातायात निर्बाध रहे। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कोरोना संकट के दौरान आक्सीजन की निर्बाध सप्लाई सहित अन्य बिंदुओं पर सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ ने पारित आदेश में साफ किया कि परमिट आदि चेक करने के नाम पर समय खराब न किया जाए। जिस तरह महत्वपूर्ण आपरेशन के दौरान एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरीडोर बनाया जाता है, वैसे ही आक्सीजन की सप्लाई भी सुगमता से संभव कराई जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पूर्व सुनवाई के दौरान आक्सीजन परिवहन के दौरान सामने आ रही समस्याओं को रेखांकित किया था। हाई कोर्ट ने इस जानकारी को गंभीरता से लेकर दिशा-निर्देश जारी किए। हाई कोर्ट ने इस रवैये पर गहरी नाराजगी जताई कि अब तक 36 घंटे के भीतर कोरोना टेस्ट रिपोर्ट मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। कोर्ट ने साफ किया कि बार-बार इस दिशा में गंभीरता बरतने की हिदायत के बावजूद लापरवाही अनुचित है। लिहाजा, शासकीय अस्पताल अपनी जिम्मेदारी को समझें। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो प्रायवेट लैब को कोरोना टेस्ट के लिए स्वतंत्र किए जाने की मांग पर विचार किया जाएगा। राज्य भी अपने स्तर पर मूल्यांकन कर सुनिश्चित करे कि शासकीय अस्पताल टेस्ट रिपोर्ट समय पर देने में समर्थ हैं या नहीं। यदि नहीं तो प्रायवेट लैब को भी यह जिम्मेदारी क्यों न दे दी जाए? हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी रोकने राज्य के अधिकार बढाए जाएं। केंद्र इस दिशा में निर्णय ले। यदि रेमडेसिविर की खरीदी व वितरण पर राज्य का सीधा नियंत्रण होगा तो कालाबाजारी पर अपेक्षाकृत ठोस अंकुश मुमकिन होगा। हाई कोर्ट ने अस्पतालों में कोरोना के इलाज की रेट लिस्ट के अलावा बेड की संख्या दर्शाए जाने की मांग को भी गंभीरता से लेकर इस दिशा में गंभीरता बरतने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव व कोर्ट मित्र बतौर वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ मौजूद रहे। हाई कोर्ट ने कोर्ट मित्र के तर्कों को सुनने के बाद राज्य शासन द्वारा पूर्व दिशा-निर्देशों के पालन की दिशा में समुचित गंभीरता न बरते जाने के रवैये पर नाराजगी जताई।


