Home मध्य प्रदेश मातृभाषा हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने की तैयारी

मातृभाषा हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने की तैयारी

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भोपाल।  प्रदेश के छात्रों को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) मातृभाषा ‎हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने की तैयारी कर रहा है। एआइसीटीई ने इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के बीच पूर्व में एक सर्वे किया था। इस सर्वे में यह बात सामने आई थी कि 44 फीसद विद्यार्थी मातृभाषा में पढ़ाई करना चाहते हैं। इसके क्रियान्वयन के लिए एआइसीटीई ने राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के जरिये पहल की है। दरअसल, हिंदी भाषा में विद्यार्थियों के लिए तकनीकी विषय की किताबें और प्रश्न बैंक उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। लिहाजा, एआइसीटीई ने स्टूडेंट लर्निंग असेसमेंट प्रोजेक्ट (एएसएसएपी) प्रोजेक्ट के तहत आरजीपीवी और छत्तीसगढ़ के तकनीकी विश्वविद्यालय को प्रश्न बैंक हिंदी में तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। प्रोजेक्ट के तहत 11 विषयों के प्रश्नपत्र दोनों राज्यों के तकनीकी विश्वविद्यालय तैयार करेंगे। इसमें भौतिकी, गणित, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग, स्प्रिच्युअल एप्टीट्यूट, फिजिकल एप्टीट्यूड, मेंटल एबिलिटी एप्टीट्यूड और इंटीग्रिटी सहित अन्य विषय शामिल है। प्रश्न बैंक के लिए अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद किया जा रहा है। इसमें प्रति दस प्रश्न के लिए संबंधित विशेषज्ञ को 400 रुपये के हिसाब से मानदेय भी दिया जाएगा। एक व्यक्ति को 500 प्रश्नों का अनुवाद करना है। इसमें आरजीपीवी से संबंद्ध कॉलेजों के फैकल्टी भी शामिल हो सकते हैं। एआइसीटीई के अधिकारी ने बताया कि देशभर के तकनीकी विश्वविद्यालयों को क्षेत्रीय भाषा में किताब और प्रश्न बैंक तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। विभिन्ना राज्यों के तकनीकी विश्वविद्यालय अपने-अपने क्षेत्रीय भाषा में प्रश्न बैंक तैयार करेंगे। गुजराती, तमिल, बंगाली सहित अन्य भाषाओं में प्रश्नों को अनुवाद किया जा रहा है। विषय विशेषज्ञों को 25 अप्रैल तक अनुवाद कर सबमिट करना है। इस बारे में एआइसीटीई के नोडल अधिकारी डॉ. सविता व्यास का कहना है ‎कि एआइसीटीई ने सभी राज्यों के तकनीकी विश्वविद्यालयों को क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्न बैंक तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। हिंदी भाषा के लिए मप्र व छग को प्रोजेक्ट दिया गया है। इससे विद्यार्थियों को फायदा होगा।

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