भोपाल । कोरोना मरीजों की बढती संख्या को देखते हुए भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 19 अप्रैल से साधारण मरीजों को ओपीडी में इलाज नहीं करने का निर्णय लिया है। इस दौरान ओपीडी में सिर्फ इमरजेंसी के मरीजों का इलाज किया जाएगा। इससे गैर कोरोना मरीजों की दिक्कतें बढ़ना निश्चित है। बता दें कि एम्स भोपाल में हर दिन करीब 3000 मरीज ओपीडी में आते हैं। इनमें भोपाल के अलावा आसपास के और दूर के जिलों के मरीज भी बड़ी संख्या में आते हैं। सुपर स्पेश्यलिटी इलाज के चलते यहां मरीजों की ज्यादा भीड़ आती है। एम्स के अधिकारियों ने बताया कि ओपीडी की वजह से कोरोना का संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा कोरोना मरीजों के लिए एम्स में बिस्तर बढ़ाए जाने है। इसके लिए अतिरिक्त चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत पड़ेगी। इस कारण ओपीडी बंद की जा रही है। हालांकि मरीजों के लिए राहत की बात यह है कि अभी हमीदिया अस्पताल और जेपी अस्पताल में ओपीडी में साधारण मरीजों को भी इलाज मिल रहा है। कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी तो यहां भी साधारण इलाज बंद हो सकता है। हमीदिया अस्पताल में रूटीन के ऑपरेशन पहले ही बंद किए जा चुके हैं। बता दें कि पिछले साल भी कोरोना का संकट शुरू होने के दो महीने बाद प्रबंधन ने नियमित ओपीडी और टाले जा सकने वाले ऑपरेशन बंद कर दिए थे। इसके बाद कोरोना मरीजों की की संख्या कम हुई तो धीरे-धीरे साधारण ओपीडी और ऑपरेशन शुरू कर दिए गए। मालूम हो कि राजधानी में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है। अस्पतालों में भर्ती करने के लिए बेड नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में कोरोना मरीजों के उचित इलाज के लिए यह निर्णय एम्स प्रबंधन द्वारा लिया गया है।


