धरमजयगढ़। रायगढ़ कलेक्टर यशवंत कुमार ने 24 सितंबर 2019 को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित जिला स्वास्थ्य समिति एवं अन्य समितियों की समीक्षा बैठक में शासकीय डॉक्टर अपने कर्तव्य को छोड़कर निजी प्रेक्टिस करने वाले डॉक्टरों को चिन्हांकन कर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। लेकिन कलेक्टर रायगढ़ के कड़ी चेतावनी के बाद भी धरमजयगढ़ विकासखण्ड के डॉक्टरों का मनमानी थम नहीं रहा है यहां के डॉक्टर अस्पताल में कम अपने निजी प्रेक्टिस में ध्यान अधिक दे रहे हैं। धरमजयगढ़ विकास खण्ड के सभी अस्पतालों का हाल यही है यहां के पीएससी में पदस्थ डॉक्टर पीएससी में न जाकर नगर में ही निजी प्रेक्टिस करने में मसगुल हो रहे हैं। अधिक धन कमाने के चक्कर में गरीब मरीजों को आर्थिक क्षति पहुंचा रहे हैं।
सिविल अस्तपाल के डॉक्टर 1 घंटा लगाते हैं अपने बच्चे को स्कूल से लाने में
शासन ने मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए गरीब आदिवासी ग्रामीणों को कोई परेशानी न हो इसके लिए सुबह 8 बजे से 2 बजे तक डॉक्टरों को अस्पताल में बैठकर ईलाज करने निर्देश दिया है लेकिन धरमजयगढ़ सिविल अस्पताल में पदस्थ कई ऐसे डॉक्टर हैं जो 12 बजे के बाद 1 घंटा के लिए अस्पताल से गायब हो जाते हैं अपने बच्चों को स्कूल से लाने के लिए जब तक डॉक्टर स्कूल से नहीं आते तब तक मरीजों को अस्पताल में डॉक्टर का इंतजार करना पड़ता है।
अस्पताल के सामने ही शासकीय डॉक्टर करते हैं निजी प्रेक्टिस
कलेक्टर द्वारा शासकीय डॉक्टरों को निजी प्रेक्टिस न करने की हिदायत देने के बाद भी सिविल अस्पताल के डॉक्टर निजी प्रेक्टिस करने से नहीं चूक रहे हैं। यहां तो ये आलम है कि डॉक्टर साहब सिविल अस्पताल के सामने ही दवाई दुकानदार के दुकान में अपना निजी क्लीनिक खोलकर प्रेक्टिस कर रहे हैं। इनको मना करने वाला कोई नहीं है। जिसका नतीजा है कि कलेक्टर द्वारा दिये गये कड़ी चेतावानी का कोई असर धरमजयगढ़ के शासकीय डॉक्टर पर नहीं दिख रहा है।

