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नाली में गंदगी-कचरे का अंबार, मच्छरों के प्रकोप ने बढ़ाई लोगों की चिंता, स्वच्छता अभियान राशि दीवाल पोस्टरों पर, सरपंच-सचिव भ्रष्टाचार में व्यस्त तो नहीं

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  1. जोहार छत्तीसगढ़ – बेमेतरा।

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के नवागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला ग्राम पंचायत जो अपने विशेष कार्यप्रणाली के कारण चर्चा में रहता है वही ग्राम पंचायत मख्नपुर का आश्रित ग्राम गोपालपुर के वार्डो में पानी निकासी नाली बना है, जिसमें निरंतर साफ- सफाई नही होने से इन नालियों में जमी गंदगी की वजह से दोनों गांव के निवासी परेशान हैं। कचरे और जमा पानी के साथ-साथ इसमें पनप रहे मच्छरों ने लोगों की सेहत के लिए हानिकारक है और आम जनता कि चिंता बढ़ा दी है। इन दोनों गॉवों में घरों के सामने बने पानी निकासी नालियों में साफ- सफाई नही होने से अमानक स्तर के गंदगी के साथ असहनीय बदूबों से इन घरों रहवासियों का रहना मुश्किल हो गया है। जहां एक ओर नालियों में जाम हुए पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और नवागढ़ क्षेत्र के जनता परेशान है, और ग्राम वासियों का कहना है कि यदि इन निकासी नालियों को अविलंब साफ- सफाई नही किया गया तो मच्छरों के काटने से संक्रामक रोगों के प्रकोप से बच नही सकते । और शासन प्रशासन द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाये गए नालियों जाम पड़ी हुई है लेकिन जिम्मेदार का ध्यान नही , बहरहाल जरूरत है कि नालियों का सही निर्माण कर पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए। क्योंकि ग्रामीणों में समस्याएं कों लेकर आक्रोश उत्पन्न हो रहा है, वही एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छता अभियान अंतर्गत ग्राम पंचायतों को मूलभूत सुविधाओं में उपलब्धता के साथ स्वच्छता अभियान अंतर्गत लाखों रूपये आबंटित कर रहा है लेकिन ग्राम पंचायत में जा कर देखा जाये तो स्वच्छता अभियान के लिए मिले राशियों को दूसरे काम पर या बिना काम किये दीवाल और पोस्टरों पर लिखकर हि बना दिया जाता है लेकिन ग्राम पंचायत में जा कर देखा जाये तो धरातल पर कुछ नही दिखाई देता है और योजनाओं के बोर्ड दीवार सजाने के लिए लगा दिए जाते हैं, यह प्रवृत्ति न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाती है, यदि विकास कार्य सचमुच ईमानदारी से हो रहे हैं तो उन्हें छिपाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। विदित हो कि व्यक्तिगत स्वच्छता हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है, जिसमें स्वच्छता बनाए रखने और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जाने वाली कई प्रथाएँ शामिल हैं। इसमें हानिकारक कीटाणुओं, जीवाणुओं और विषाणुओं के प्रसार को रोकने के लिए अपने शरीर, परिवेश और दैनिक आदतों का ध्यान रखना शामिल है। व्यक्तिगत स्वच्छता का अर्थ समझना और इसके महत्व को पहचानना एक स्वस्थ और अधिक संतुष्टिदायक जीवन की ओर ले जा सकता है। इस आवश्यक पहलू की उपेक्षा के दुश्परिणामों से स्वयं के साथ सभी को भुगतना पड़ता है।अब सवाल साफ है..? जब नालियों में गंदगी, हवा में बदबू और बीमारी का डर हो, तब दीवारों पर लिखी स्वच्छता आखिर किस काम की?

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