जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखण्ड में कई कोल ब्लॉक आने वाला है, कोल ब्लॉक को आने से रोकना जरूरी है नहीं तो धरमजयगढ़ का नाम इतिहास के पन्ने में देखा जायेगा? कोल कंपनी किसी भी कीमत में कोयला खोदना चहते हैं चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े। दुर्गापुर, शाहपुर, तराईमार में एसईसीएल का सर्वे का काम चल रहा है, ग्रामीण सर्वे का विरोध कर रहे हैं। ग्राम सभा में कोल ब्लॉक का विरोध करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया है। तो वहीं तराईमार में कुछ लोग कोल ब्लॉक का समर्थन किया है तो कुछ लोगों ने ग्राम सभा में विरोध दर्ज करवाया है। कोल ब्लॉक का विरोध प्रभावितों को मिलकर करना चाहिए ताकि इनकी आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचे। ग्रामीणों का विरोध कुछ दलालनुमा लोग खुब चालाकी से उठा लेते हैं, ग्रामीणों को ऐसे दलालनुमा लोगों को अपने आंदोलन से दुर रखना होगा नहीं तो ये लोग कब ग्रामीणों को धोखा देकर कंपनियों का खास बन जायेंगे ग्रामीणों को हवा भी नहीं लगेगा? क्योंकि पूर्व में आप लोगों ने देख लिया है कि घूमघूम कर बालको, डीबी का विरोध करने वाले धरमजयगढ़ वासियों के साथ क्या किया है, ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है नहीं तो पूर्व की तरह इसबार भी ग्रामीणों को धोखा देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा।
पुरूंगा वासियों से सीखे कैसे करना है विरोध
11 नवंबर 2025 को अंबूजा सीमेंट कंपनी का पुरूंगा में कोल ब्लॉक का पर्यावरण जन सुनवाई होना था, लेकिन प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की विरोध के कारण जन सुनवाई स्थागित किया गया। ग्रामीणों को जन सुनवाई स्थागित करवाने में सफलता इसलिए मिला कि ग्रामीण बहुत जल्द ही समझ गया था कि जो बाहरी लोग ग्रामीणों का हमदर्द बनकार आ रहे है ओ लोग ग्रामीणों का हमदर्द नहीं कंपनियों का दलाल है जो कंपनी से मोटी रकम लेने के फिराक में है। ग्रामीण इन बहारी विरोधियों को भाव नहीं दिया और अपनी लड़ाई स्वयं लड़े और सफलता हासिल किया। अगर सही समय पर इनको पहचान नहीं पाते तो ग्रामीण पर्यावरण जन सुनवाई स्थागित नहीं करवा पाते।
छाल कोल ब्लॉक से सबक ले पुरूंगावासी
अंबूजा सीमेंट (अडानी) द्वारा पुरूंगा अंदर ग्राउंड कोल खदान खोलने के लिए पर्यावरण जन सुनवाई करवाने को उतवाले हैं। और ग्रामीणों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि पुरूंगा कोल मांइस अंदर ग्राउंड है इससे ग्रामीणों को कोई परेशानी नहीं होगी। ग्रामीणों की खेत जमीन सुरक्षित रहेंगा, खेती बाड़ी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा, प्रशासन कोल कंपनियों के साथ मिलकर कंपनी वालों की बोली बोलते हैं। कंपनी सिंर्फ विरोध न हो इसके लिए शुरूआत में भूमिगत खदान खोलने का प्रस्ताव बनाया है एक बार कोयला खोदने का अनुमति मिलने के बाद धीरे से भूमिगत को ओपन खदान में परिवर्तन करने में कंपनी वालों को समय नहीं लगेगा? आप खुद देख सकते हैं कि छाल कोल खदान का क्या स्थिति है, शुरूआत में छाल का कोल खदान भी भूमिगत था लेकिन कुछ ही साल में कंपनी वालों ने भूमिगत को ओपन खदान में परिवर्तन कर लिया है, इसलिए पुरूंगा वासियों को इस बात का ख्याल रखते हुए विरोध करना होगा ताकि भविष्य में परेशानी न हो।



