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कूमा मीडिल स्कूल में शिक्षकीय लापरवाही उजागर, ग्रामीणों ने उठाया निरीक्षण प्रणाली पर बड़ा सवाल!

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कई प्रकार की उपाय कर रहे हैं, सरकार की शिक्षा नीति को धरमजयगढ़ विकास खण्ड में ठेंगा दिखाया जा रहा है, शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों का जायजा लेने नहीं जाते हैं जिसके कारण धरमजयगढ़ विकास खण्ड के कई ऐसे स्कूल हैं जिसमें शिक्षक महिनों से लापता है और शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को इसकी खबर तक नहीं है? विकासखंड धरमजयगढ़ के ग्राम पंचायत कुमा में संचालित मीडिल स्कूल इन दिनों शिक्षकीय लापरवाही का केंद्र बना हुआ है। पदस्थ सहायक शिक्षक प्रवीण मिंज के लगातार अनुपस्थित रहने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। वहीं स्कूल में पदस्थ एक अन्य शिक्षक ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि प्रवीण मिंज जून माह में विद्यालय आए थे, लेकिन इसके बाद कभी-कभार ही स्कूल पहुंचे हैं। बाद में मेडिकल छुट्टी में होने का हवाला देते रहे। इतना ही नहीं, ग्रामीणों और शिक्षक के अनुसार वे शराब के नशे में विद्यालय आते देखे गए, जिससे शिक्षा व्यवस्था की गरिमा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जून महीने के बाद शिक्षक का स्कूल में दर्शन तक नहीं हुआ। बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे छोड़ देने जैसी स्थिति बन गई है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि अब ऐसी लापरवाही और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए वे इस पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने की तैयारी में है। मामले ने अब बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकासखंड शिक्षा अधिकारी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण नहीं करते? यदि निरीक्षण व्यवस्था मजबूत होती, तो शायद बच्चों की पढ़ाई इस तरह प्रभावित न होती? वहीं ग्रामीणों की आवाज अब प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच चुकी है, और उम्मीद यही है कि जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटेगी तथा शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठायेंंगे।

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