जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
आसान नहीं है प्रशासन को अंबुजा सीमेंट के लिए जनसुनवाई कराना। अभेद्य सुरक्षा कवच को लांघने में प्रशासन के फूल रहे हाथ पैर। गांव वालों की सजगता और एक जुटता के आगे नतमस्तक होना पड़ेगा प्रशासन को। पुरूंगा गांव और कोल ब्लॉक क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद है गांव वाले। परिंदा भी पर नहीं मार सकता क्षेत्र में। गांव वालों की सजगता और दृढ़ संकल्प शक्ति के साथ डटे हुए हैं क्षेत्रीय विधायक। पीछले एक माह से रोज खबर चलाने वाले पत्रकारों के कलम की स्याही भी लगी सुखने, अब अधिकांश पत्रकारों के विरोध के स्वर होने लगे बंद। अडानी कंपनी के कार्यालय में सुबह-शाम उपस्थिति देने वाले अधिकांश पत्रकार चुप रहने और विरोध में समाचार ना चलाने के लिए कर लिया गया है मैनेज। कहते हैं जब जागो तभी सवेरा और आखीरकार पुरूंगा, सामरसिंघा कोकदार के ग्रामीण जाग गए और ऐसे जागे कि अब जब तक प्रस्तावित अंबूजा सीमेंट कोयला खदान की जनसुनवाई को प्रशासन द्वारा निरस्त नहीं किया जायेगा तब तक ये ग्रामीण जागरण कर इस श्रेत्र की रात दिन रखवाली करेंगे।
गजब का जज्बा और जुनून देखने को मिल रहा है पुरूंगा सहित पुरे इलाक़े में क्या बच्चे क्या बुढ़े और क्या जवान सबका एक ही काम जब तक प्रस्तावित अंबूजा सीमेंट कोयला खदान निरस्त नहीं होता है तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा। इधर यह चर्चा भी जोरों पर है कि ग्रामीणों के आंदोलन के एवज में कुछ लोगों द्वारा कंपनी से लिफाफा ले लिया गया है इसलिए खदान के विरोध में समाचार की जो बाढ़ आई हुई थी वो धीरे धीरे सिमटने लगी है और कुछ समाजसेवी जो अन्ना हजारे बनकर वहां पहुंच रहे थे उनके पैरों में भी मेहंदी लगा दिया गया है। दबे पांव यह भी चर्चा है कि कुछ लोगों का पेट बहुत बड़ा है जिसे अडानी पुरा नहीं कर पा रहा है फिर भी उम्मीद पर दुनिया कायम है इस उम्मीद पर कुछ कथित समाज सेवी कंपनी में अपनी दलील पेश कर रहे हैं कि हमारे बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं डीबी पावर और बालको को मैंने ही भगाया है इसलिए सोच लो मैं जैसा चाहूंगा वैसे गांव वालों को मैनेज कर सकता हूं। कहा यहां तक जा रहा है कि यह तथाकथित समाजसेवी और भारत माला राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना में भी मुआवजा बढ़ाने के नाम पर जमकर दलाली खाया है पर लगता है इस बार गांव वालों से यह कुछ और ना खा जाए।



