जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।
अंबुजा सीमेंट के लिए आबंटित कोल ब्लॉक के जनसुनवाई में सिर्फ प्रभावित गांवों के लोगो को अपनी बात वो भी सिर्फ पर्यावरण के संबंध में रखना चाहिए तभी सार्थक परिणाम आयेगा। बाहरी लोगों खासकर NGO वाले और स्वयंभू पत्रकार वहां सिर्फ आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्यों से जा रहें हैं।पुरूंगा के ग्रामीण इलाकों में जो कभी नहीं गया ऐसा एक स्वयंभू समाज सेवी पीछले 20 वर्ष से तमनार क्षेत्र के खदानों के खिलाफ आंदोलन चलाकर अपना घर चला रहा है इसकी ना कोई नौकरी,ना कोई व्यवसाय धंधा फिर भी बंदा हर जगह विरोध करने पहुंच जाता है कैसे और क्यों? क्योंकि अप्रत्यक्ष रूप से यह कंपनी का दलाल है और ग्रामीण इलाकों में लोगों को कानूनी ज्ञान बांट कर उलझा कर रखता है यह पेसा , पांचवीं अनुसूची,वन अधिकार कानून की बात करता है जनता को पूछना चाहिए कितने गांव को वश अधिकार पत्र दिलवाया है ? सौ बात की एक बात खदान से पर्यावरण को बचाने के लिए गांव वालों को संगठित होकर स्वयं संघर्ष करना होगा और बाहरी दलालों, समाजसेवा के नाम पर कंपनी से मोटा चंदा लेने वाले को गांव से खदेड़ना होगा। बड़े बड़े दावे करने वाले रायगढ़ के एक नेता जो अपना घर नहीं बचा पाए और तमनार क्षेत्र में खदानों के खिलाफ आवाज उठाने के नाम पर समता जैसी संस्थाओं से फंडिंग लेकर परिवार पालने वाला का काला सच बहुत जल्दी गांव वालों को समझ में आयेगा। गांव वालों को सिर्फ उलझाए रखनें के लिए इन जैसे लोगों को कंपनी ही भेजता है ताकि माहौल बना हुआ दिखाई दे। जागरुक होकर पुरूंगा वालों इनसे बस इतना ही पूछों तुम करते क्या हो , तुम यहां किसलिए और कैसे आए और आने जाने का खर्च कौन वहन किया??



