जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
गौ वंश की सुरक्षा को लेकर नए-नए संगठन तो बन जाते हैं किंतु बनने के बाद में सिर्फ अपनी रोटी सेकने वाले तैयार हो जाते हैं किंतु हकीकत यूं कहें कि जिम्मेदारों की कमी है और जिम्मेदारियां की कमी के वजह से गौवंश की रक्षा करना कहीं दुर्लभ स्थिति देखने को मिल रहा है कंकाल में तब्दील गौवंश कि तस्वीर जिसे देखकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे आप भी तर तर हो जाएंगे किस तरीके से वह अपने जीवन गुजर बसर किए होंगे ना चारा ना पानी कैसे चलाएं होंगे अपनी जि़ंदगी इस तस्वीर स्पष्ट बया करता है कि प्रशासनिक उदाशीनता के वजह से गौवंश खतरे में है सैकड़ो गाय को वन विभाग के द्वारा बनाए गए 157 एकड़ की जमीन पर घेराबंदी करके डाल दिया गया किंतु चारे और पानी की व्यवस्था करें तो मौत भी आपको दिखाई भी नहीं देगा सोचिए यह सीजन बरसात का है तो पानी नदी नाले में आपको आसानी से मिल जाएगा किंतु यह मौसम यदि गर्मी का रहे तो उस दौरान में एक बूंद पानी के लिए इंसान को तड़पना पड़ा घूमने पड़ा तो मवेशी तार जाली अंदर है वह बाहर अपनी प्यास बुझाने के लिए कैसे आते, मवेशियों की कंकाल तस्वीर को देखकर आप अनुमान लगाए की किस तरीके से उनके साथ में स्वार्थी लोगों ने अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए कितनी कूटनीति और रणनीति अपनाई होगी आज गोवंश खतरे में है किसी को दिखाई नहीं दे रहा है और ना ही लोग शुद्ध ले रहे हैं। आखिर जिम्मेदारी किसकी है मवेशियों की सुरक्षा को लेकर नित नए-नए कानून सरकार बना रहे हैं किंतु सुरक्षा का नजर कहीं देखने को नहीं मिल रहा है लाखों करोड़ों रुपए गांव सेवा आयोग पर खर्च कर दिए जाते हैं किंतु मवेशियों की सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं लेता गारंटी के नाम पर सिर्फ दिखावे का खेल चलता है आखिर कब तक उनके नाम पर लोग अपनी स्वार्थ सिद्ध करते रहेंगे।
सुशासन दिवस पर भी ग्रामीणों ने लगाई थी कलेक्टर को गुहार किंतु कार्यवाही के नाम पर महज लोगों को छला गया है नतीजा मवेशियों की खुली आसमान के नीचे मौत हो जाना और कंकाल में तब्दील हो जाना इस बात की गवाही देता है कि प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही चरम सीमा पार हो गई कहीं ना कही सुशासन के नाम पर सिर्फ आम लोगों को बेवकूफ बनाया गया है कार्यवाही के नाम पर आम जनता को छला गया है और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया गया।
प्रशासन की उदासीनता और गौ वंश की रक्षा पर उठ रहे सवाल का कौन देगा जवाब..?
गांव सेवा आयोग के अलावा ग्रामीण अंचलों पर गौ सेवक के रूप में कार्य करने वाले लोगों की तादात बढ़ती नजर आ रही है किंतु हकीकत यह है कि गौ वंश की ना तो सुरक्षा कर पा रहे हैं ना ही उसका समुचित व्यवस्था अनुशासन कर पा रही है ना प्रशासन न आम जनता क्योंकि आम जनता स्वार्थ में डूब चुके हैं और अपने आप को स्वच्छ और सुंदर बनाने के चक्कर में मवेशियों की गोबर उठाने में घिन आता है। नतीजन घर में रखे पशुओं को खुला छोड़ दे रहे हैं और वही पशु आवारा और घुमंतू बन रहा है ऐसे पशु किसानों के खेतों में लगे खून पसीने की उपज फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहे है।



