जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ को अगर बचाना है तो जनता को अपनी लड़ाई स्वयं को लडऩी होगी न की इन जनप्रतिनिधि और दलालनुमाओं के दम पर ये लोग तो पहले भी चिल्ला बिल्लाकर चुप रह चुके हैं, कि हम जनता के साथ है जनता जैसे चाहेगी वैसा ही होगा मगर ये तो बस एक दिखावा होता है? कुछ धरमजयगढ़ के छूठ भैया नेता उद्योगपतियों के सामने सर झुकाए बैठते हंै? चाहे वह कोई भी पार्टी के नेता क्यों न हो इनकी पोल तो तब खुल गयी थी, जब कुछ सालों पहले धरमजयगढ़ में वेदांता और डीवी पॉवर का कोल ब्लॉक खुलने की प्रक्रिया चल रहा था तब ये लोग कंपनियों का विरोध रोज माईक लगाकर करने लगे थे। लेकिन इनकी सच्चाई ओर कुछ था।
जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
प्रेस क्लब अध्यक्ष नारायण बाइर्न ने धरमजयगढ़ की जनता से अपील की कि ऐसे जनप्रतिनिधि और दलालनुमा लोगों से अपनी सुरक्षा का आस न रखे, ये लोग किसी का भलाई नहीं करने वाले हैं ये तो बस अपना विकास कैसे हो इसकी आस रखे हुए हैं न की जनता की, नारायण बाईन ने प्रेस को बताया कि धरमजयगढ़ को अगर बचाना है तो जनता को अपनी लड़ाई स्वयं को लडऩी होगी न की इन जनप्रतिनिधि एवं दलालनुमाओं के दम पर। ये लोग तो पहले से ही उद्योगपतियों के सामने सर झुकाये बैठते हैं? चाहे वह कोई भी पार्टी के नेता क्यों न हो? इनकी पोल तो तब खुल गया था, जब कुछ सालों पहले धरमजयगढ़ में वेदांता और डीवी पॉवर का कोल ब्लॉक खुलने की प्रक्रिया चल रहा था। तब ये लोग विरोध रोज माईक लगाकर चिल्ला-चिल्ला कर कर रहे थे कि हम जनता के साथ है जनता जैसा चाहेगी वैसा ही होगा मगर ये तो बस एक दिखाया था? कंपनी वालों से पैसा लेने का, और हम जनता इन चालाक जनप्रतिनिधियों और दलालनुमा के चंगुल में आकर सोच रहे थे कि ये तो हमारा मसीहा है, जब तक हम सच्चाई समझ पाते हैं तब तक ये धरमजयगढ़ को बेचने का कुचक्र रच चुके होते हैं और धरमजयगढ़ वासियों को बताता रहता हैं कि हम लोग धरमजयगढ़ क्षेत्र में कोई भी कोल ब्लॉक को नहीं आने देंगे। इन नेताओं का पोल तो तब खुल गया था जब इनके द्वारा वाकयदा लेटरपेड में लिखकर समर्थन किया गया था। लेटरपेड में समर्थन लिखते समय इन नेताओं को जरा सी भी शर्म नहीं आई, इन्होंने एक बार भी नहीं सोचा था कि आज हम क्या लिख रहे हैं ये लिखते हैं कि कोल ब्लॉक आने से धरमजयगढ़ का विकास होगा। कोल ब्लॉक आने से धरमजयगढ़ का विनास होगा न की विकास? ये लोग जनता का नहीं, उद्योगपतियों का सेवा करते हैं? इसलिए ऐसे जनप्रतिनिधि और दलालनुमा लोगों से आस न रखे, कि ये दलालनुमा लोग धरमजयगढ़ में कंपनियों को आने से रोकेंगे ऐसा कभी भी नहीं करेंगे ये लोग? अगर धरमजयगढ़ को बचाना है तो जनता को स्वयं अपनी लड़ाई लडऩी होगी बिना जनप्रतिनिधि और दलालनुमा के, जनता को योजनाबद्ध तरीके एवं कानून का सम्मान करते हुए अपनी लड़ाई लडऩी होगी आंदोलनकारियों को किसी भी प्रकार का कोई नियम विरुद्ध आंदोलन नहीं करना चाहिए अगर जनता नियम से अपनी लड़ाई लड़ती है तो आंदोलनकारियों की जीत निश्चित है। शिंगूर से अगर टाटा जैसी कंपनी को 90 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने के बाद भी शिंगूर छोड़कर भागना पड़ा तो फिर ये … क्या है?



