जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के नवागढ़ देशी शराब दुकान की मिलावट खोरी की हकीकत तस्वीर विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों पर बढ़ता संदेश आखिर क्यों रायपुर के उडऩ दस्ता को जांच करने के लिए आना पड़ा? क्या जिला अधिकारी एवं आबकारी निरीक्षक नहीं करते थे जांच? सवाल तो बनता है और क्यों ना बने क्योंकि लोगों के साथ में बड़ा स्कैम हो रहा था इस वाक्या को लेकर लगातार नए-नए प्रश्न उठते जा रहे हैं वही एक ओर बेमेतरा पुलिस अधीक्षक द्वारा अवैध गतिविधियों व अवैध शराब की बिक्री करने कोचियों पर अंकुश लगाने लगातार थाना चौकी प्रभारी को निर्देश जारी किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मिलावट खोरी और कोचियों को बढ़ावा देने वाले अवैध गतिविधियों पर लगातार सक्रियता बढ़ रही है और विभागीय आबकारी अधिकारी चुप्पी साधे बैठी हुई हैं। सरकारी शराब दुकान में पानी मिलाए जाने का मामला में सुपरवाइजर सहित 9 कर्मचारियों को रायपुर उडऩदस्ता की टीम ने धर दबोचा मौके पर जिला आबकारी अधिकारी डॉ पलक नंद की मौजूदगी में हुई। लगभग सात पेटी प्लेन देशी शराब को जप्त कर कर्मचारियों को लेकर चले गए अब देखने वाली बात यह है कि उक्त मामले पर किस तरह कार्यवाही करते हैं। वहीं नवागढ़ आबकारी निरीक्षक की क्या भूमिका थी और उन पर किस तरह की विभागीय कार्यवाही करेंगे यह एक बड़ा सवाल है। उनके बगैर जानकारी इस तरह की मिलावट खोरी शराब दुकान के अंदर भला कैसे हो सकता है। सवालो के घेरे आबकारी निरीक्षक, निरीक्षक के नाम पर कहीं खाना पूर्ति तो नहीं करते थे। यह बात हम नहीं बल्कि एक विचारणीय विषय है। जो जिम्मेदारी मिला था उनको बखुबी से करना था किन्तु ऐसा नहीं होना संदेह का विषय है। बहरहाल देशी शराब दुकान पर पकड़े गए नौ कर्मचारियों को कार्यवाही के लिए लेकर गया है वहीं कार्य पर रुकावट ना हो इसको ध्यान में रखते हुए अन्यत्र स्थान के कर्मचारियों को वहां पर पद स्थापना दी गई है।
बीते वर्ष भी सुपरवाइजर को बचाकर बाकी कर्मचारियों पर ब्लैकलिस्टेड की कार्रवाई हुई थी
बेमेतरा पिकरी देशी शराब दुकान के सुपरवाईजर कृष्णा रजक सहित 7 लोगों पर कार्यवाही करने के लिए जिला कार्यालय लेकर आए थे जिसमें कबुल किया गया था की कृष्णा रजक के कहने पर शराब में पानी मिलावटी का काम करते थे किंतु कृष्णा रजक व आबकारी निरीक्षक द्वारा कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवा कर मुख्य आरोपी कृष्णा रजक को छोड़ दिया वही 6 कर्मचारियों को ब्लैकलिस्टेट कर दिया गया। कहीं ना कहीं आबकारी निरीक्षक के संज्ञान में सब चल रहा था। तभी अपने आप को बचाने के लिए सुपरवाइजर कृष्णा रजक को छोड़कर बाकी पर कार्यवाही कर दी थी।



