संजीव वर्मा
प्रदेश की राजनीति में बीते सोमवार का दिन खास चर्चा में रहा, क्योंकि एक ओर जहां सत्ताधारी भाजपा ने मैनपाट में आयोजित चिंतन शिविर में अपने मंत्रियों, सांसदों और विधायक को अनुशासन का पाठ पढ़ाया और भ्रष्टाचार से दूर रहने की नसीहत दी, तो वहीं दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने किसान, जवान और संविधान जनसभा आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर बरसी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने कार्यकर्ताओं में जोश भरा और भाजपा को सीधी चुनौती दी कि हिम्मत है तो संविधान से ‘समाजवाद और धर्मनिरपेक्षÓ को हटाकर दिखाए। दरअसल, दोनों प्रमुख पार्टियों का एक ही दिन बड़ा आयोजन महज एक संयोग ही रहा। भाजपा ने चिंतन शिविर के बहाने ही सही अपने मंत्रियों, सांसदों और विधायकों पर नकेल कसने की कवायद शुरू कर दी है। जिस तरह से डेढ़ साल की सरकार में भ्रष्टाचार की सुगबुगाहट हो रही है, उस पर समय रहते ही लगाम लगा देना समझदारी है। शायद यही वजह है कि चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में ही राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में भ्रष्टाचार को ही केंद्र बिंदु में रखा। उन्होंने पार्टी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप लोग ठेकेदारों और दूसरी अन्य व्यवस्थाओं से दूर रहें। उनके चंगुल में न फंसे, वरना दोबारा चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उनका यह बयान 2018 के विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के संबोधन की याद दिला रहा है तब डॉक्टर सिंह ने कार्यकर्ताओं को भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी से दूर रहने की हिदायत दी थी। खैर, चिंतन शिविर में नड्डा ने सत्ता और संगठन के बीच समन्वय रखने की नसीहत भी दी और संगठन के साथ अधिक तालमेल बिठाकर जमीनी स्तर पर काम करने को कहा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जनता के बीच ले जाने और विकास कार्यों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने के निर्देश दिए। वैसे चिंतन शिविर को पूरी तरह गोपनीय रखा है। किसी को भी मोबाइल फोन ले जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। यानी शिविर में मोबाइल बैन रहा। उधर, कांग्रेस ने भारी बारिश के बीच रायपुर में आयोजित किसान, जवान और संविधान जनसभा के जरिए सत्तारूढ़ भाजपा को यह संदेश देने में सफल रही कि प्रदेश में उनकी जड़ें मजबूत है और वह किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया और उन पर अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को शह देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खदानों के लिए छत्तीसगढ़ के जंगलों से लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं। यहां उद्योगपति कोयला और माइनिंग को लूटने के लिए आ रहे हैं। यहां की जनता के लिए कोई नहीं आ रहा है। अमित शाह बार-बार छत्तीसगढ़ इसलिए आ रहे हैं, ताकि यहां के जंगल को उजाड़ सके। कोयला कहां हैं, स्टील कहां हैं और आयरन ओर कहां हैं? इन सब चीजों को देखने के लिए वे आ रहे हैं, इसलिए हमें मजबूती के साथ उनके खिलाफ लडऩा होगा। इससे साफ संकेत है कि पार्टी इस मामले में कोई नरमी नहीं दिखाएगी। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी के लिए भी साफ संदेश है कि वे इन मामलों को गंभीरता से लें और जनता की लड़ाई लड़ें। यह सच है कि आज सरगुजा के हसदेव अरण्य में अडानी की परियोजनाओं के लिए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। बस्तर में भी खदानों को बड़े उद्योगों को देने की तैयारी है। ऐसे में कांग्रेस इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर छिटकने नहीं देना चाहेगी। बहरहाल, भाजपा-कांग्रेस के इस बड़े आयोजन से प्रदेश की राजनीति किस करवट बैठेगी, यह समय बताएगा। लेकिन, दोनों के अपने मायने हैं। भाजपा ने जहां चिंतन शिविर को औपचारिकता से परे नेतृत्व तैयार करने, संगठन को सशक्त बनाने और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का माध्यम बताया है। तो वहीं कांग्रेस को अपनी किसान, जवान और संविधान जनसभा के बहाने जनता को सरकार की असफलताएं बताने, अपने कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने और पार्टी में एकता बनाए रखने के साथ सरकार को अपनी ताकत दिखाने का मौका मिला है। इस मौके को कांग्रेस ने भुनाया भी है। बारिश के बीच जिस तरह से सभा में भीड़ उमड़ी उससे कांग्रेसी गदगद हैं।



