जोहार छत्तीसगढ़-जांजगीर-चांपा।
जिले के मुख्यालय जांजगीर में खेल मैदान में बने दिल्ली के लाल किला के मॉडल को जिले का गौरव और शान कहा जा सकता है। यह मॉडल न केवल ऐतिहासिक धरोहर की याद दिलाता है, बल्कि जिले के सांस्कृतिक और सौंदर्य बोध को भी दर्शाता है। लेकिन वर्तमान में यह मॉडल और उसका सम्मान दोनों नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला की लापरवाही का शिकार हो गए हैं।
दरबान की प्रतिमा नाली में गिरी
लालकिला मॉडल के सामने सुरक्षा के प्रतीक के रूप में बनाए गए दरबान (रक्षक) की प्रतिमा बीते काफी दिनों से सड़क किनारे बनी नाली में गिरी हुई है। यह स्थिति न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि पूरे जिले की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली है।
अधिकारियों की लापरवाही
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह स्थान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नियमित आवागमन मार्ग में पड़ता है, फिर भी इसे अनदेखा किया जा रहा है। आसपास के ठेला और गुमटी संचालकों ने बताया कि दरबान की प्रतिमा काफी समय से नाली में गिरी हुई है। कई बार उन्होंने यह बात नगरपालिका के अधिकारियों के संज्ञान में लाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।
प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल
यह दर्शाता है कि प्रशासन की प्राथमिकताओं में जिले की छवि और सौंदर्य का कोई सरोकार नहीं है। जब जनता के पैसों से बनवाए गए मॉडल की देखरेख भी न की जाए तो नगर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजमी है। अब देखना यह है कि नगर पालिका परिषद जांजगीर-नैला के अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं। क्या वे दरबान की प्रतिमा को नाली से निकालकर उसकी मरम्मत करेंगे या फिर इसे ऐसे ही छोड़ देंगे, जनता को इसका जवाब मिलना बाकी है।



