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विकास के नाम पर मनमानी कर रही मलका कंपनी …बिना मुआवजा दिए हथिया रही किसानों की जमीन!       

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जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।

क्षेत्र में कई ऐसी बड़ी परियोजनाओं का क्रियान्वयन हो रहा है जिनका एकमात्र उद्देश्य विकास है। कुछ प्रोजेक्ट के स्थापित होने पर स्थानीय लोगों को लाभान्वित किए जाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन विकास के नाम पर आम लोगों के हितों को दरकिनार कर अपना स्वार्थ साधने का संगठित प्रयास अभी भी जारी है। जैसा कि हमने पहले भी इस बात को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें हमने बताया था कि किस तरह से नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक परियोजना से जुड़े कार्य को बेधड़क अंजाम दिया जा रहा है।       यह सिलसिला अब भी बदस्तूर जारी है और हर बार की तरह जिम्मेदार अब भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।                 धरमजयगढ़ क्षेत्र में एक जल विद्युत परियोजना का काम तेज गति से चल रहा है। जिसके लिए धरमजयगढ़ मांड नदी से लगे हुए  प्रभावित क्षेत्र में नहर निर्माण का काम किया जा रहा है। इस बड़े प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन मेसर्स मलका रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के द्वारा किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक इस परियोजना के लिए वन व राजस्व भूमि के कुछ हिस्से प्रभावित हो रहे हैं। जिनके उपयोग के लिए संबंधित कंपनी को एनओसी मिल गई है।  लेकिन अब यह बात सामने आ रही है कि परियोजना क्षेत्र में जिन किसानों की निजी भूमि प्रभावित हो रही है उस पर प्रभावित किसानों के विरोध के बाद भी काम शुरू कर दिया गया है और भूमि स्वामी अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। धरमजयगढ़ के दमास में जिन किसानों की जमीन इस परियोजना में आ रही है उनमें से कुछ लोगों से हमने बात की। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें अब तक उनकी जमीन का मुआवजा राशि नहीं दिया गया है और  कंपनी के द्वारा निर्माण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके मना करने के बावजूद जिम्मेदार अपनी मनमानी करने पर तुले हुए हैं। वे कहते हैं कि खेती के दिनों में उनके जमीन पर काम शुरू कर दिया गया है जिससे उस जमीन पर फसल नहीं लगा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर संबंधित कंपनी के जिम्मेदार सिर्फ आश्वासन के भरोसे लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। यह हद दर्जे की मनमानी का एक छोटा सा नमूना है जिसमें  नियमों को ताक पर रखकर जिम्मेदार अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं।     यही नहीं, इस परियोजना के क्रियान्वयन में कई ऐसे तथ्यों को गंभीर रूप से नजरअंदाज किया जा रहा है जो स्थानीय लोगों के लिए नुकसानदेह और नियमों के विपरीत है। इस पूरे मामले पर सिलसिलेवार तरीके से उन विषयों को सामने लाएंगे जिससे यह एकदम साफ हो जायेगा कि संबंधित जिम्मेदार विकास के नाम पर किस तरह से स्थानीय प्रशासन व लोगों को छलने का काम कर रही है।             

 मुआवजे को लेकर संशय                     

इस मामले में प्रभावित किसानों के जमीन के मुआवजे के संबंध में धरमजयगढ़ एसडीएम डिगेश पटेल ने बताया कि संबंधित कंपनी के द्वारा मुआवजा दिए बिना निजी भूमि का उपयोग करना गलत है। उन्होंने बताया कि कंपनी प्रभावित किसानों की जमीन की रजिस्ट्री कराएगी।  वहीं, इस परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक सिंह ने इस प्रोजेक्ट को लेकर पूछे गए सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया। वे हर सवाल का गोलमोल जवाब देते रहे। प्रोजेक्ट मैनेजर के इस तरह के रवैये से यह स्पष्ट हो जाता है कि वास्तविक तथ्यों को छिपाते हुए विकास की झूठी बुनियाद खड़ी की जा रही है।

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