छत्तीसगढ़

तत्कालीन एसडीओ इन्द्रजीत बर्मन को सुप्रीम कोर्ट से नोटिस, 28 नवंबर तक जवाब तलब, जगदीश बंसल द्वारा 1 करोड़ की मानहानि को लेकर दायर की गई थी एसएलपी

जोहार छत्तीसगढ़-सक्ती।
सुप्रिम कोर्ट ने सक्ती के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) इन्द्रजीत बर्मन सहित अन्य दो लोगों को नोटिस जारी कर समंस प्रेषित किया है। शीर्ष अदालत ने सभी को आगामी 28 नवंबर तक न्यायालय में उपस्थित होकर अपना जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह पूरा मामला वर्ष 2018-19 का है, जब सक्ती में पदस्थापना के दौरान तत्कालीन एसडीओ इन्द्रजीत बर्मन पर जगदीश बंसल एवं उनके परिवार से व्यक्तिगत रंजिश रखने और उन्हें विधि-विरुद्ध नोटिस प्रेषित कर शारीरिक, आर्थिक व मानसिक रूप से परेशान करने का आरोप लगा था। आरोप है कि बर्मन द्वारा परेशान न करने के एवज में 5 लाख रुपये की अवैध राशि की मांग की गई थी। इसके विरोध में बंसल ने अधिकारी को वैधानिक नोटिस भेजा, जिससे क्षुब्ध होकर एसडीओ द्वारा बंसल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराकर उन्हें जेल भिजवा दिया गया था। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने उक्त एफआईआर को विधि-विरुद्ध पाते हुए निरस्त कर दिया था। एफआईआर निरस्त होने के बाद, जगदीश बंसल ने बर्मन द्वारा पद व प्रभाव का दुरुपयोग करने, बदले की भावना से कार्रवाई करने तथा इससे हुई आर्थिक क्षति व सामाजिक प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान की भरपाई के लिए बर्मन के खिलाफ 1 करोड़ रुपये के हर्जाने (मानहानि) का मामला प्रस्तुत किया। जिला न्यायालय एवं उच्च न्यायालय से राहत न मिलने पर बंसल ने सुप्रीम कोर्ट दिल्ली का दरवाजा खटखटाया और 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने हेतु विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। 13 अक्टूबर 2026 को याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तत्कालीन एसडीओ इन्द्रजीत बर्मन सहित अन्य दो को उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया।
पूर्व में भी लग चुकी हैं गंभीर टिप्पणियां
उल्लेखनीय है कि जगदीश बंसल और तत्कालीन एसडीओ बर्मन के बीच निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक कई मामले चल रहे हैं, जिनमें से कई प्रकरण बंसल के पक्ष में तय हो चुके हैं। कमिश्नर व राजस्व मंडल सहित अन्य न्यायालयों ने अपने आदेशों में बर्मन के कृत्य पर गंभीर टिप्पणियां की हैं।
पूर्व में बर्मन द्वारा बंसल के व्यावसायिक कार्यालय को भी विधि-विरुद्ध तरीके से बुलडोजर चलाकर तोड़ दिया गया था, जिस पर सुनवाई करते हुए राजस्व मंडल ने उक्त निर्माण को बंसल की निजी भूमि पर पाया और उन्हें मुआवजे का हकदार ठहराया। इसके अलावा, बर्मन द्वारा बंसल की पत्नी हेमलता के विरुद्ध भी कराई गई एफआईआर का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट में बंसल की ओर से अधिवक्ता रविन्द्र श्रीवास्तव, अंशुमान एवं अभिजीत श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।

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