जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
धरमजयगढ़ से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध बंजारी मंदिर के सौंदर्यीकरण का मामला अब चर्चा में आ गया है। भारतमाला परियोजना के तहत मंदिर के सामने सड़क निर्माण कर रही डीबीएल कंपनी की भूमिका और मंदिर में मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष की एक पोस्ट ने मामले को और गरमा दिया है। पोस्ट में डीबीएल कंपनी के अधिकारी प्रदीप सिंह से हर महीने पांच हजार रुपये लेने का आरोप लगाते हुए मंदिर में लाइटिंग व्यवस्था को लेकर सवाल उठाया गया है।
निर्माण के दौरान मंदिर को नुकसान होने पर सुधार का था आश्वासन
जानकारी के अनुसार, भारतमाला परियोजना के तहत बंजारी मंदिर के सामने सड़क निर्माण का कार्य डीबीएल कंपनी द्वारा किया जा रहा है। निर्माण कार्य से मंदिर को किसी प्रकार की क्षति पहुंचने की स्थिति में सुधार कराने की बात कंपनी की ओर से मंदिर समिति को लिखित रूप में दिया था। नवरात्र पर्व को देखते हुए मंदिर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया गया। नगर पंचायत के एक वार्ड पार्षद ने मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की मांग की थी। इसके बाद कंपनी की ओर से बताया गया कि लिखित आश्वासन के अनुरूप बोर खनन, हैंडपंप, मंदिर का रंग-रोगन तथा शंकर मंदिर तक सड़क निर्माण सहित कुछ कार्य कराए गए हैं। कंपनी ने आगे भी आवश्यक कार्य कराने की बात कही है। लेकिन मंदिर परिसर में लाइटिंग व्यवस्था को लेकर पार्षद जानू सिदार ने सोशल मीडिया पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होना आवश्यक है। इसी मुद्दे पर युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई, जिसके बाद मंदिर के विकास के साथ-साथ कथित लेन-देन को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई।
पांच हजार रुपये हर महीने लेने का आरोप, आखिर किस पर उठ रहे सवाल?
युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यदि डीबीएल के प्रदीप सिंह से हर महीने पांच हजार रुपये लिए जा रहे हैं, तो जानू भाई मंदिर तो कहां होगा लाइटिंग जुगाड़। अब देखना हम करेंगे डीबीएल का जुगाड़। इस पोस्ट के बाद लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं कि आखिर हर महीने पांच हजार रुपये कौन ले रहा है? यदि हर महिने भुगतान हो रहा है, तो उसका उद्देश्य क्या है और राशि किसे दी जा रही है? युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष को उनका नाम भी बताना चाहिए। मामला धार्मिक स्थल के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़ा है। ऐसे में सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहने के बजाय आरोप लगाने वाले को तथ्य स्पष्ट करने चाहिए।
डीबीएल अधिकारी प्रदीप सिंह ने आरोपों से किया इनकार
इस संबंध में डीबीएल कंपनी के अधिकारी प्रदीप सिंह से बात करने पर उन्होंने किसी को भी हर महिने किसी प्रकार की राशि देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कंपनी की ओर से किसी को मासिक भुगतान नहीं किया जाता है। मंदिर के सौंदर्यीकरण को लेकर उन्होंने बताया कि कंपनी अपने वादे के अनुसार आगे भी कार्य कराएगी, ताकि मंदिर परिसर बेहतर दिखाई दे और श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिल सकें। कंपनी अधिकारी के इस बयान के बाद अब सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए तथ्य सामने आना जरूरी है। अब बड़ा सवाल यह है कि बंजारी मंदिर में लाइटिंग व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया में लगाये गये पांच हजार रुपये के कथित मासिक भुगतान को लेकर उठे सवालों पर आरोप लगाने वाले क्या प्रमाण सामने रखेंगे?








