छत्तीसगढ़

आखिर धरमजयगढ़ में सरकारी जमीन कैसे हो गई निजी जमीन?… शासकीय आरा मिल, राइस मिल और बीड़ी कारखानों की जमीन आज निजी नाम पर दर्ज, शासकीय भवनों की जमीन को लेकर भी उठे गंभीर सवाल

जोहार छत्तीसगढ़ – धरमजयगढ़।

धरमजयगढ़ में कभी सैकड़ों एकड़ शासकीय जमीन होने की बात कही जाती है, लेकिन आज स्थिति यह है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए जमीन की कमी बताई जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वर्षों से शासकीय उपयोग में रही जमीन आखिर गई तो गई कहां? धरमजयगढ़ में शासकीय जमीन के निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज होने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से धरमजयगढ़ कॉलोनी क्षेत्र में संचालित रहे शासकीय आरा मिल, राइस मिल और बीड़ी कारखानों की जमीन को लेकर लोगों के बीच चर्चा है कि जिस भूमि पर वर्षों तक सरकारी संस्थान और कारखाने संचालित होते रहे, वही भूमि निजी व्यक्तियों के नाम कैसे दर्ज हो गई?

जब सरकारी कारखाने संचालित थे तो जमीन किसकी थी?

धरमजयगढ़ कॉलोनी क्षेत्र में एक समय शासकीय आरा मिल और राइस मिल संचालित होने के साथ ही दो बीड़ी कारखाने भी संचालित होने की जानकारी सामने आती है। इन संस्थानों के संचालन के लिए शासन द्वारा भवन और अन्य सुविधाएं विकसित की गई थी। अब सवाल यह है कि यदि उक्त भूमि शासकीय उपयोग के लिए आवंटित थी और वहां वर्षों तक सरकारी कारखाने संचालित होते रहे, तो बाद में उसी जमीन का स्वरूप और स्वामित्व कैसे बदल गया?

शासकीय क्वार्टरों की जमीन को लेकर भी उठे सवाल

मामला केवल आरा मिल और राइस मिल तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। धरमजयगढ़ में वर्षों तक अधिकारी-कर्मचारियों के निवास के लिए इस्तेमाल किए गए शासकीय क्वार्टरों की जमीन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कई पुराने शासकीय भवनों को तोड़े जाने और उनकी जमीन के वर्तमान स्वामित्व को लेकर स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। यदि कोई भूमि वास्तव में शासकीय थी और उस पर दशकों तक शासकीय आवास बने रहे, तो उस जमीन का निजी व्यक्ति के नाम दर्ज होना अपने आप में जांच का विषय है।

वार्ड क्रमांक 5 में पुराने मकानों को तोडऩे का मामला भी चर्चा में

धरमजयगढ़ के वार्ड क्रमांक 5 में अंग्रेज जमाने के पुराने मकानों को तोड़े जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि को निजी बताते हुए पुराने भवनों को हटाया गया। अब यदि उसी जमीन के संबंध में यह बात सामने आती है कि वह किसी निजी व्यक्ति के नाम दर्ज हो चुकी है अथवा उसे निजी व्यक्ति को सौंपा गया है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका को लेकर

यदि वर्षों तक किसी भूमि पर शासकीय भवन, आरा मिल, राइस मिल, बीड़ी कारखाने अथवा शासकीय आवास संचालित होते रहे, तो संबंधित राजस्व रिकॉर्ड में भी उसका उल्लेख और दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव होते समय संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी या नहीं? यदि जानकारी नहीं थी तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला हो सकता है। और यदि जानकारी थी, तो फिर शासकीय भूमि के निजी नाम पर दर्ज होने की प्रक्रिया की जांच और भी जरूरी हो जाती है।

पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगालने की जरूरत

पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए केवल वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं होगा। प्रशासन को पुराने खसरा, बी-1, नक्शा, मिसल, बंदोबस्त रिकॉर्ड, नामांतरण आदेश, पट्टा दस्तावेज और संबंधित शासकीय विभागों के रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि जिस भूमि पर कभी शासकीय संस्थान संचालित होते थे, उसका वर्तमान खसरा नंबर क्या है, वर्तमान रिकॉर्ड में भूमि किसके नाम दर्ज है और किस आदेश के आधार पर उसका स्वामित्व अथवा भूमि का स्वरूप बदला गया।

उच्चस्तरीय जांच से ही सामने आएगी हकीकत

धरमजयगढ़ में शासकीय जमीन के कथित रूप से निजी हाथों में जाने का मामला यदि सही है तो यह केवल किसी एक व्यक्ति की जमीन का मामला नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। जांच में पुराने रिकॉर्ड और वर्तमान रिकॉर्ड का मिलान कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि धरमजयगढ़ की शासकीय जमीन का स्वामित्व कब, कैसे और किन परिस्थितियों में बदला।

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