छत्तीसगढ़

सिविल अस्पताल में डीएमएफ मद से हो रहा घटिया निर्माण, घटिया निर्माण पर अस्पताल प्रबंधन एवं जीवन दीन समिति मौन

 

जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

सिविल अस्पताल धरमजयगढ़ में डीएमएफ मद से कराए जा रहे रिन्यूवेशन कार्य की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य में लापरवाही बरती जा रही है और गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। अस्पताल की दीवारों पर लगाए जा रहे टाइल्स को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि टाइल्स को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लगाने के बजाय सामान्य सीमेंट से चिपकाया जा रहा है, जबकि बेहतर मजबूती के लिए अन्य सामग्री का उपयोग किया जाना चाहिए। वहीं अस्पताल के वार्डों में गुणवत्ता विहिन टाइल्स लगाए जा रहे हैं। इस संबंध में बीएमओ द्वारा ठेकेदार से चिकने टाइल्स लगाने को कहा गया तो ठेकेदार ने जवाब दिया कि धरमजयगढ़ में चिकने टाइल्स उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें बाहर से मंगाने पर करीब 20 से 25 दिन का समय लग जाएगा, इसलिए फिलहाल यही टाइल्स लगाए जा रहे हैं। जबकि धरमजयगढ़ के टाइल्स दुकान में भरपूर अच्छी गुणवत्ता वाली टाइल्य उपलब्ध है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्थान में गुणवत्ता से समझौता क्यों किया जा रहा है? वार्डों में जिस तरह से टाइल्स लगावाया जा रहा है वह बहुत ही जल्दी दीवाल से अलग होकर निकल जायेंगे?

इस मामले में जब बीएमओ से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि टाइल्स लगाने में किस सामग्री का उपयोग किया जाता है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब नया हॉस्पिटल बनने वाला है। अब सावाल उठता है कि अगर नया अस्पताल भवन जल्द ही बनने वाला है तो फिर लाखों रूपये पानी में क्यों बहाया जा रहा है।

वहीं पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर ने बताया कि ठेकेदार को बेहतर काम करने के लिए कहा गया है और वे समय-समय पर कार्य का निरीक्षण भी करते हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि निरीक्षण के बाद भी यदि निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? डीएमएफ मद की राशि का सदुपयोग हो रहा है या फिर सरकारी पैसों की बर्बादी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

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