भोपाल । कोर्ट द्वारा मिली रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद जबलपुर के सिटी हॉस्पिटल संचालक मोखा की पत्नी जसमीत कौर व मैनेजर सोनिया खत्री को गुरुवार शाम कोर्ट के निर्देश पर जेल भेज दिया गया। उधर नया खुलासा हुआ है कि जबलपुर सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कोरोना संक्रमित 171 मरीजों को 209 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए गए थे, जिनमें नौ मरीजों की मौत हो गई थी। एसआइटी द्वारा अब तक की गई जांच पड़ताल में यह पुख्ता जानकारी सामने आई है। नकली इंजेक्शन का उपयोग 23 से 28 अप्रैल के बीच किया गया था। सिटी हॉस्पिटल में 20 अप्रैल से आठ मई के बीच कोरोना संक्रमित 34 मरीजों ने जान गंवाई थी। इधर, जांच पड़ताल में अस्पताल का एकाउंटेंट शक के दायरे में आ गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार उसने अस्पताल के बिलिंग कम्प्यूटर के साफ्टवेयर में छेड़छाड़ की थी। एक्सपर्ट की सहायता से कम्प्यूटर की जांच कराई जा रही है। प्रकरण में उसे भी आरोपी बनाया जा सकता है। वहीं मोखा का बेटा हरकरण अब भी पुलिस गिरफ्त से बाहर चल रहा है जिसकी गिरफ्तारी के लिए एसआईटी लगातार संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है। एसआईटी अब तक नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की 197 क्षतिग्रस्त वॉयल बरामद कर चुकी है। जिसमें 12 देवेश से और 185 वायल पुल नंबर दो के पास मोखा के खाली प्लॉट और लोहिया पुल के नीचे से बरामद हुई। एसआईटी की रिमांड में जसमीत और सोनिया ने स्वीकार किया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले 171 मरीजों को 209 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की डोज लगाई गई थी। जिसमें से नौ मरीजों की की मौत हो गई थी। इधर, 20 अप्रैल से अस्पताल में भर्ती होने वाले 468 मरीजों की सूची में शामिल मृत मरीजों के स्वजन के कथन लिए जा रहे हैं। इधर, एसआइटी सूत्रों ने बताया कि नकली इंजेक्शन मामले में सिटी अस्पताल के कुछ और कर्मचारियों पर शिकंजा कस सकता है। सबसे ज्यादा संलिप्तता एकाउंटेंट की उजागर हुई है। जिसने दवाओं की खरीदी व उपयोग संबंधी डेटा कम्प्यूटर से फॉर्मट कर दिया है। उधर मोखा के बेटे हरकरण की तलाश में एसआइटी दबिश दे रही है। आशंका जताई जा रही है कि वह जबलपुर में ही कहीं छिपा हुआ है। एसआइटी ने उसकी गिरफ्तारी पर इनाम प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजा है। हरकरण बार बार मोबाइल बदल रहा है जिससे उसकी गिरफ्तारी संभव नहीं हो पा रही है। इधर, हरकरण की तलाश में जुटी टीम प्रोडक्शन वारंट पर गुजरात से सपन जैन, सुनील मिश्रा समेत नकली इंजेक्शन बनाने वाले गिरोह के सरगना को जबलपुर लाने की तैयारी कर रही है। मालूम हो कि गुजरात की मोरबी थाने की पुलिस ने नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन के कारोबार का पर्दाफाश किया था। जिसके बाद गुजरात पुलिस ने अधारताल आशानगर निवासी सपन जैन को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद पता चला कि सिटी हॉस्पिटल में 500 से ज्यादा नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की खरीदी की सप्लाई की गई थी। जिसके बाद अस्पताल के डायरेक्टर सरबजीत सिंह मोखा, उसकी पत्नी जसमीत कौर, अस्पताल की मैनेजर सोनिया खत्री शुक्ला, अस्पताल में मेडिकल स्टोर चलाने वाले देवेश चौरसिया को आरोपी बनाया गया। इस बारे में पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा का कहना है कि सिटी हॉस्पिटल में 171 कोरोना मरीजों को 209 नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए गए थे। नकली इंजेक्शन वाले नौ मरीजों की मौत हो गई थी। मोखा, उसकी पत्नी ने 185 तथा देवेश चौरसिया ने 12 नकली इंजेक्शन नष्ट किए थे। एसआइटी मामले की विेवेचना कर रही है।


