Home छत्तीसगढ़ सरकार पुरूंगा कोयला खदान को निरस्त करें, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन?

सरकार पुरूंगा कोयला खदान को निरस्त करें, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन?

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।

कोयला खदान को लेकर रायगढ़ जिले में बवाल मचा हुआ है, ग्रामीणों द्वारा फर्जी जन सुनवाई का आरोप लगाकर जिंदल और प्रशासन के खिलाफ 12 दिसंबर से आंदोलन कर रहे हैं। तो वहीं धरमजयगढ़ विकास खण्ड के पुरूंगा कोल मांइस को लेकर भी ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीण किसी भी हाल में अंबुजा सिमेंट को आबंटन कोल ब्लॉक शुरू नहीं होने देने का शपथ ले लिया है, प्रभावित ग्रामीणों ने गांव में नजर बनाए हुए हैं कि कोई बाहरी व्यक्ति गांव में तो नहीं आ रहे हैं। हमारे भोले भाले ग्रामीणों को कंपनी के चलाक एवं दलालनुम लोग बहला फुसलाकर अपने पक्ष में तो नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में सरकार को संदेश पहुंचा रहे हैं कि सरकार पुरूंगा कोयला खदान को निरस्त करें नहीं तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों को एकजूटता के साथ करना होगा कंपनियों को विरोध

ग्रामीणों के विरोध के कारण एक बार जन सुनवाई स्थागित तो कर दिया गया है प्रशासन द्वारा, लेकिन अब जब भी जन सुनवाई की तिथि की घोषणा होगा तो प्रशासन हर हाल में जन सुनवाई सफल करवाने का कोशिश करेंगे जिसका ताजा उदाहरण है तमनार में हुए जन सुनवाई। 14 गांव के ग्रामीणों के विरोध के बाद भी कुछ दलालनुमा लोगों को अपने पक्ष में करके जन सुनवाई 100 प्रतिशत सफल करवा लिया। कंपनी और प्रशासन ऐसा न कर सके इसके लिए प्रभावित ग्रामीणों को एकजूटता और ईमानदारी के साथ विरोध करना होगा, नहीं तो ये लोग जन सुनवाई सफल कराने कामयाब हो जायेंगे।

ग्रामीण अपने दम पर करें कंपनी का विरोध

कोयला खदान का विरोध सिर्फ और सिर्फ अपने दम पर करें ग्रामीण दलालनुमा लोगों के भरोसे में नहीं? एक बार फिर जन सुनवाई स्थागित कराने के लिए ग्रामीणों को बाहरी लोगों के भरोसे में नहीं रहना होगा। बाहरी लोग जो हमारे हमदर्द बनते हैं ओ सिर्फ दिखावे के लिए हमारे साथ रहते हैं इनका तो एक ही काम है दिन में ग्रामीणों के साथ शाम होते ही कंपनी के ऑफिस के चौखट में दिखाई देते हैं, ऐसे लोगों से हमें सर्तक रहना होगा। अगर किसी को हमारी बातों पर याकिन न हो तो तमनार में ग्रामीणों द्वारा किये जा रहे आंदोलन स्थल पर जाकर देखे जो लोग हमारे गांव में आकर बड़ी-बड़ी बात करते हैं ओ लोग एक भी नजर नहीं आयेंगे, ऐसे हमदर्द का क्या मतलब जो दु:ख के समय ग्रामीणों के साथ खड़ा न हो सके।

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