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जान जोखिम में डाल कर जिंदगी गढऩे को मजबूर नन्हें-मुन्ने बच्चे… स्कूल भवन विहीन कुम्हीचुवां का प्राथमिक शाला… बच्चों को नहीं मिल रहा पौष्टिक आहार, दाल के नाम पर सिर्फ पानी जैसा दाल

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़।
शिक्षा का स्तर को बढ़ाने के लिए शासन हर प्रकार का प्रयास कर रहा है, शिक्षक विहीन या फिर एकल शिक्षक वालों स्कूलों में शिक्षकों को पदस्थ तो किया जा रहा है। लेकिन धरमजयगढ़ विकास खण्ड में स्कूलों की हालत दैनिय है, इस और किसी की नजर नहीं पड़ रहा है। छोटे-छोटे नन्हें मुन्ने बच्चे जान जोखिम मेंं डाल कर अपनी जिंदगी गढऩे में लगे हैं। और हमारे जनप्रतिनधि बच्चों के हालत को देखकर भी तमाश बीन बन बैंठे हैं। आज हम बात करने जा रहे हैं कापू क्षेत्र के एक ऐसे स्कूल का जहां बच्चे भी भरपूर है, शिक्षकों की भी कमी नहीं है यहां कमी है तो सिर्फ और सिर्फ बुनियदी सुविधाओं की।

स्कूल भवन नहीं होने से बच्चों को भेड़ बकरियों की तरह ठूस-ठूस कर बैठाया जा रहा

कुम्हीचुवां प्राथमिक शाला भवन पूरी तरह जर्जर हो गया है, जर्जर होने के कारण बच्चों को अतिरिक्त कक्ष में दो कक्षा के बच्चों एक साथ बैंठाया जा रहा है। अतिरिक्त कक्ष भी छोटा पडऩे के कारण प्रार्चाय कक्ष में बच्चों को ठूस दिया जा रहा है। शिक्षक ने बताया कि स्कूल में 83 बच्चों का नाम दर्ज है, बच्चों की उपस्थिति भी अच्छा है लेकिन बच्चों को बैंठाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है जिसके कारण बच्चों को एक साथ बैठाना पड़ता है।

बच्चें स्कूल में ही लेते हैं स्विमिंग पुल का मजा?

कुम्हीचुवां स्कूल का हाल तो ये है कि थोड़ी बरसात में ही स्कूल का आंगन स्विमिंग पुल रूप ले लेता है, आंगन में पानी भर जाने से स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, इस ओर न तो अधिकारियों का ध्यान है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों का, आंगन में पानी की जमाव हो जाने से स्कूली बच्चे पूरी तरह से भीग जाते हैं।

पीने के लिए बच्चों को घर से लाना पड़ता है पानी

स्कूल में बच्चों के लिए पीने का पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, स्कूल कैम्पस में एक हेण्ड पंप तो लगा है पर पानी नहीं देता है, पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्कूली बच्चे अपने घर से बोतल में पानी लेकर आते हैं। तो वहीं मध्याह्न भोजन बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि खाना बनाने के लिए लगभग आधा किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। हेड मास्टर राठिया ने बताया कि हेण्ड पंप को बनाने के लिए कई बार बोला गया है लेकिन हेण्ड पंप को सुधारा नहीं जा रहा है। पानी की समस्या के बारे में सचिव से पूछने पर बताया कि हेण्ड पंप को सुधारा गया था, हो सकता है फिर कुछ हो गया है मैं इसको दिखवाता हूं।

शासन की भोजन में पौष्टिकता नहीं?

छत्तीसगढ़ सरकार स्कूली बच्चों को पौष्टिक मध्याह्न भोजन दिया जाता है, लेकिन कुम्हीचुआं प्राथमिक शाला में सरकार का पौष्टिक भोजन बच्चों को नहीं मिल रहा है, हरी सब्जी के जगह स्कूली बच्चों के थाली में आलू और दाल के बदले दाल का पानी परोसा जा रहा है। स्कूली बच्चों ने बताया कि हर दिन दाल और आलू की सब्जी दिया जाता है। इसके शिवा और कुछ नहीं दिया जाता है। जबकि शासन के नियम से हर दिन अलग-अलग सब्जी दिया जाना होता है।

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