जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
बेमेतरा जिले की शासकीय माध्यमिक शाला उमरिया, हेमाबंद में एक बार फिर स्कूल समय से पहले बंद करने का मामला सामने आया है, जिससे जिला शिक्षा अधिकारी के बार-बार जारी होने वाले आदेशों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। डीईओ लगातार स्कूलों में अनुशासन और समय-पालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी कर रहे हैं और उचित कार्रवाई की बात भी दोहराते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ऐसा लगता है कि विभागीय अधिकारियों की उदासीनता और लचर निगरानी व्यवस्था के चलते सरकारी स्कूलों के शिक्षकों में किसी भी तरह की कार्रवाई का डर खत्म हो चुका है। यह घटना सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाती है। यदि डीईओ के स्पष्ट आदेशों के बावजूद स्कूल अपनी मनमर्जी से बंद किए जा रहे हैं, तो यह स्पष्ट संकेत है कि निचले स्तर के अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं। शिक्षकों को यह आभास है कि उनके खिलाफ कोई ठोस या त्वरित कार्रवाई नहीं होगी, और यही कारण है कि वे नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाने से गुरेज नहीं कर रहे। प्रश्न उठता है कि आखिर किसकी शह पर यह अनुशासनहीनता फल-फूल रही है। क्या खंड शिक्षा अधिकारी बीईओ और संकुल समन्वयक अपने क्षेत्रों में स्कूलों की नियमित जांच नहीं कर रहे हैं, या जानबूझकर इन लापरवाहियों को अनदेखा कर रहे हैं। जब तक इन जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मिसाल पेश करने वाली कार्रवाई नहीं होगी, तब तक बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता रहेगा और सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कम होता जाएगा। डीईओ को अब सिर्फ आदेश जारी करने से आगे बढ़कर, इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। इसमें आकस्मिक निरीक्षण, दोषियों पर त्वरित निलंबन जैसी कार्रवाई और जवाबदेह अधिकारियों पर शिकंजा कसना शामिल होना चाहिए।



