जोहार छत्तीसगढ़-बेमेतरा।
सरकारी काम काज व योजनाओं का एक आम नागरिक पारदर्शी तरीके से पता लगा सके और भष्टाचार को दूर करने के लिए सरकार द्वारा जन सूचना अधिकार 2005 कानून पारित कर इसमें हर एक व्यक्ति को जानकारी प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। कोई भी व्यक्ति कहीं से भी जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत किसी भी प्रकार की सूचना मांग सकता है। जिसके तहत उस विभाग के उक्त अधिकारी को आरटीआई अधिनियमों के तहत एक माह में आवेदक को वह जानकारी देनी होती है लेकिन जन सूचना अधिकारी के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध आरटीआई अधिनियम सशक्त हथियार है आम आदमी जनसूचना अधिकार 2005 को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक शस्त्र मानता है लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही से आरटीआई अधिनियम भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। क्योंकि आम आदमी द्वारा मांगी गई सूचना को विभागीय अधिकारी समय से नहीं उपलब्ध कराते। इससे साफ जाहिर है कि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को सार्वजनिक होने से डरते हैं। जिसका ताजा उदाहरण बेमेतरा जिले के नवागढ़ विकास खण्ड के शासकीय हाई सेकेण्डरी स्कूल गाडामोड़ का है जहां। आवेदक ने सूचना का अधिकार के अधिनियम 2005 तहत 12 सितंबर 2024 को हायर सेकेंडरी स्कूल गाडामोड़ में किस-किस मद में कितना रुपया आवंटित हुआ और खर्चा हुआ आवंटित राशि से संबंधित का सम्पूर्ण दस्तावेज कैश, मैमों बाउचर की प्रमाणित छायाप्रति के महत्वपूर्ण जानकारी चाही गई थी। लेकिन हायर सेकेण्डरी स्कूल गाडामोड़ के प्रचार्य जनसूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए एक माह बीत जाने के बाद भी जानकारी नहीं दी गई है, जानकारी देने में की जा रही आना-कानी से सवाल तो उठना लाजमी है आखिर किस बात का जन सूचना अधिकारी को डर या भय व्याप्त है जिससे जानकारी देने में परहेज कर रहे हैं। इससे यह जाहिर होता है कि विभागीय भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। बहरहाल आवेदक ने कहा है कि चाहीं गई जानकारी ना मिलने पर अब विधि सम्मत प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष किया जाएगा जहां उन्हें आरटीआई अधिनियमों के तहत प्रथम अपील में नि:शुल्क जानकारी देना पड़ेगा जनसूचना अधिकारी द्वारा जानकारी नहीं देना धारा-आरटीआई एक्ट का उल्लंघन है।



