जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़। हमर गांव हमर बिजली सफ लता पूर्वक उत्पादन शुरू कर दिया गया। यह एक साझा प्रयास है ऐसे गांव जो सुदूरवर्ती क्षेत्रों में है जहां ग्रिड से पावर जाना अभी संभव नहीं दिखता। ऐसा ही एक गांव है मालिकछार जहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है सड़क पानी और बिजली पांच किलोमीटर पैदल चलकर जाना होता है अपने सामुदायिक प्रयासों से पहाड़ों पर गांव वालों ने स्वयं बिना शासकीय सहयोग के मोटरसाइकिल और ट्रेक्टर जाने लायक सड़क का निर्माण किया है जहां बरसात के मौसम को छोड़कर जाया जा सकता है। ग्रामीण को बिजली मिले इसलिए ग्रामीण पर्या विकास अनुसंधान समिति द्वारा जून 2023 में चालू कर 17 फ रवरी 2024 से नियमित रूप से विद्युत उत्पादन चालू कर दिया गया है, और आज टर्बाइन से 1800 मीटर दूर मालिकछार गांव अंडरग्राउंड केबल तार से विद्युत पहुंच गया बहुत जल्दी गांव के सभी घरों में जिनकी संख्या 57 है और एक आंगनबाड़ी केंद्र व एक स्कूल जहां प्रत्येक घर में 5 बल्ब और पंखा टेलीविजन के लिए कनेक्शन जोड़ दिया जाएगा। पीछले वर्ष से लगातार समुदाय के लोगों के साथ बैठक आयोजित कर हमर गांव हमर बिजली पर सहमति बनी अब वो दिन आ ही गया जब गांव के लोगों का अपना पावर हाउस मूर्त रूप लेने लगा। पोरिया फ ाल माइक्रो-हाइड्रोपावर प्लांट के लिए फ्लो डिस्चार्ज 160 आईपीएस है जिसका साइट हेड 29 एम है और टर्बाइन चयन चार्ट के आधार पर, चयनित टरबाइन प्रकार क्रॉसफ्लो टर्बाइन तकनीक के अंतर्गत आता है। क्रॉसफ्लो टर्बाइन प्रौद्योगिकी में मध्यम श्रेणी में प्रवाह निर्वहन और शीर्ष के व्यापक मूल्य है जो उन्हें ऑफ.ग्रिड ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म जल विद्युत परियोजनाओं के लिए व्यापक रूप से उपयोग करने के लिए बनाते हैं। क्रॉसफ्लो टर्बाइनों को एक साधारण डिजाइन के साथ स्थानीय रूप से भी अनुकूलित किया जा सकता है जिसके परिणामस्वरूप रखरखाव लागत कम होती है इसलिए सूक्ष्म जलविद्युत परियोजना को टिकाऊ बनाता है। क्रॉसफ्लो टर्बाइन प्रौद्योगिकी में मध्यम श्रेणी में प्रवाह निर्वहन और शीर्ष के व्यापक मूल्य है जो उन्हें ऑफ.ग्रिड ग्रामीण क्षेत्रों में आधार पर चयनित टरबाइन प्रकार क्रॉसफ्लो टर्बाइन तकनीक के अंतर्गत आता है। क्रॉसफ्लो टर्बाइन प्रौद्योगिकी में मध्यम श्रेणी में प्रवाह निर्वहन और शीर्ष के व्यापक मूल्य है जो उन्हें ऑफ.ग्रिड ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म जल विद्युत परियोजनाओं के लिए व्यापक रूप से उपयोग करने के लिए बनाते हैं। इस टरबाइन डिजाइन परियोजना को ग्रामीण पर्या विकास अनुसंधान समिति के प्रो. डीएस मालिया बताते हैं कि पोरिया धरमजयगढ़ और मालीकछार जिला कोरबा प्रोजेक्ट डेवलपमेंट और मेरे शोध अध्ययन के हिस्से के रूप में मैं स्वयं एवं प्रमोद चंदेल, गुलाब पटेल एवं आलोक, अभिषेक द्वारा वित्त पोषित किया गया है।



