भोपाल । प्रदेश की स्वास्थ्य एवं शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए
प्रदेश की पूर्व मुख्यमत्री साध्वी उमा भारती ने कहा कि इनमें सुधार की आवश्यकता है। साध्वी भारती ने एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए कहा कि पेट भरने लायक कमाई करने वालों के पास भी निजी स्कूल की महंगी फीस देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा तो अभावग्रस्त लोग सरकारी सुविधाओं से वंचित हो गए और उन्हें अपने प्रियजनों की जान बचाने के लिए जेवर, जमीन तथा घर बेचकर निजी अस्पतालों के बिल देने पड़े। शायद इस कोरोना संकट में हम अपनी भूल सुधारने के लिए विवश हो जाएं और स्वास्थ्य की सरकारी सेवाओं को गरीबोन्मुखी कर सकें। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार में मंत्री रहने के दौरान मैंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि जो भी मुनाफा आए, उसे शिक्षा और स्वास्थ्य की सरकारी सेवाओं पर खर्च किया जाए। उन्होंने कहा कि आर्य समाज एवं सरस्वती शिशु मंदिर में शिक्षा के क्षेत्र में तो कई चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में सेवाभाव से काम किया। हालांकि बाद में व्यवसायिकता के चलते अन्य जगह अमानवीयता के साथ फीस वसूली जाने लगी। उन्होंने कहा कि हमारे देश की शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सरकारी व्यवस्थाएं बहुत ही खराब हैं। इसी कारण कोरोना संकट गहरा गया। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को ढांचा गिर चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इसे फिर से खड़ा कर सकते हैं। दोनों सेक्टर में निजीकरण के बाद से ही गरीबों के लिए संकट शुरू हुआ।


