खरगोन में जिला प्रशासन ने कोरोना संक्रमण में काम आने वाली फेविपिरावीर (फेबी फ्लू) टेबलेट को जिले की चिन्हित मेडिकल दुकानों पर इस दवाई की उपलब्धता की बात कही थी किंतु पहले दिन से ही खरगोन के इन दवाई दुकानों पर फेविपिरावीर दवाई के लिए पीड़ितों के परिजन डॉक्टर की पर्ची लेकर खरगोन की एक दवाई दुकान से दूसरी दवाई दुकान तक दौड़ लगाते नजर आए खरगोन की जिंन दवाई दुकानों पर यह दवा वितरित की गई थी उन अधिकांश दवाई दुकानों पर इस दवाई के खपत ज्यादा होने के कारण कई लोगों को यह दवाई नहीं मिल पाई ओर कई मरीजों को तो इस दवाई के बगैर ही लौटना पड़ा बुधवार को भी खरगोन की चिन्हित दुकानोंं पर यह दवाई का वितरण नहीं होने केेे कारण समस्या बनीी रही क ई दवाई दुकान विक्रेताओं ने तो बताया कि यह दवाई के पाच पत्ते ही दिए गए थे और है और मांग इतनीी ज्यादा कि कईयों को तो दवाई ना होने के कारण मना करना पड़ा है केस केमिस्ट्री सहित कई दवाई दुकानदारों ने बताया कि किसी दवाई दुकानदार को तीन दवाई के पत्ते तो किसी को पांच पत्ते दिए गए थे उल्लेखनीय है कि खरगोन में दवाई के फुटकर विक्रेता केस केमिस्ट पर हर प्रकार की दवाई मिलनेेेे के कारण इस दवाई दुकान पर हमेशा भीड़ बनी रहती है जिस कारण इस दवाई दुकान पर ज्यादातर लोग डॉक्टरों की पर्ची लेकर यहीं पर आते हैं खरगोन के डॉक्टरों द्वारा अधिकांश यह दवाई लिख कर दिया जा रही है उल्लेखनीय है कि यह दवाई कोरोना संक्रमण में मददगार साबित होकर यह टेबलेट लगभग 10 से 15% लंस डैमेज के असर को ख़त्म करने के काम में आती है ड्रग्स इंस्पेक्टर कपिल नागर ने बताया कि खरगोन की चिन्हित दवाई दुकानों पर यह दवाई उपलब्ध कराई गई है किंतु कई लोगों द्वारा डॉक्टरों की पर्ची की आड़ में इसे लेकर रखा जा रहा है जिस कारण यह दवाई जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रही है जिले कि चिन्हित दवाई दुकानों प्रतिदिन दवाई दुकानों पर वितरण का कार्य कर दवाई की कमी को नहीं आने दिया जाएगा


