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विष्णु के सुशासन में अपराधियों के हौसले बुलंद, बलौदाबाजार में पत्रकारों के साथ हुई लूटपाट व मारपीट की घटना

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जोहार छत्तीसगढ़-रायपुर।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के गृह जिला बलौदाबाजार में अप्रिय घटना थमने का नाम ही नहीं ले रहा। एक बार फिर लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर लूटपाट व मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया है। बताते चले की बीते गुरुवार की रात्रि 8 से 9 बजे के करीब बलौदाबाजार,रायपुर मार्ग स्थित शासकीय पोलिटेक्निक कॉलेज सकरी के सामने मेन रोड में आपराधिक प्रवृति के लोगों द्वारा पूर्वनियोजित ढंग से पत्रकारों को रोककर लूटपाट व मारपीट किया गया है। जिले में लचर कानून व्यवस्था के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद हंै तथा उनके द्वारा अनेकों घटनाएं कारित की जा रही है। पत्रकारों की आवाज को दबाने वाली इस घटना की सभी ओर घोर निंदा हो रही है तथा निष्पक्ष जांच व कार्रवाही न होने पर पत्रकार संगठनों द्वारा उग्र आंदोलन की बात कही जा रही है।
षडय़ंत्र करके पूर्व नियोजित तरीके से हुआ घटना
घटना का विवरण इस प्रकार है कि पत्रकार गोविन्द रात्रे को आबकारी विभाग में पदस्थ अधिकारी जैलेश सिंह का फ ोन आया और उसे मिलने के लिए बुलाया गया। जहां पर कुख्यात शराब कोचीया अक्षय गिरी द्वारा अधिकारी व पत्रकारगण की उपस्थिति में धमकी दिया गया और उसके कुछ घंटे पश्चात् धमकी देने वाले ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पत्रकारों को रास्ते में रोका तथा उनसे मारपीट व लूटपाट किया एवं जान से मारने की धमकी दी। हमलावरों ने मारपीट का वीडियो भी बनाया तथा उस वीडियो को अधिकारी जैलेश सिंह को भेजा गया। हमले में बुरी तरह घायल गोविन्द रात्रे के बेहोश होने पर उन्हें मरा समझकर वहा से भाग निकले।

पीडि़त को एफआईआर लिखाने में करना पड़ा संघर्ष

जलेश सिंह के शह में खुलेआम दादागिरी करने वाले अक्षय गिरी व उनके गुंडे द्वारा लूटपाट व मारपीट करने की घटना से जब थाना प्रभारी को पीडि़त द्वारा बताया गया तो उन्होंने तुरंत एफ आईआर लिखवाता हूं। आप लोग पहले डॉक्टरी मुलाहिजा करा लीजिए करके सिपाही के साथ हॉस्पिटल भेजा। इसी बीच जैलेश सिंह सिटी कोतवाली आकर टीआई साहब से मिले और उनके बीच बातचीत हुई। उसके बाद से टीआई द्वारा एफआईआर न लिखकर पहले जांच करने की बात कही जाने लगी। घटना से सम्बंधित सभी साक्ष्य जैसे जलेश सिंह के द्वारा फोन करके पत्रकार को अपने पास मिलने बुलाने की कॉल रिकॉडिंग अधिकारी व अन्य पत्रकारों के सामने अक्षय गिरी द्वारा खुलेआम धमकी देने वाला विडिओ रिकॉर्ड, सकरी में लूटपाट व मारपीट किये जाने के समय सक्षम आई विटनेस शरीर को घोर उपहति होना इत्यादि पर्याप्त साक्ष्य मौजूद है। उसके बाद भी पीडि़त को एफ आईआर कराने में काफी मसक्कत करना पड़ा तब जाके सुचना के चौबीस घंटे बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गयी। लेकिन फिर भी घटना कारित करने के पीछे का मुख्य षडय़ंत्रकारी अधिकारी जलेश सिंह को मुख्य आरोपी नहीं बनाया गया है। बता दे की अपराधियों द्वारा मारपीट करके अपने मोबाइल में वीडियो रिकॉर्ड किया गया है जिसे काम हो गया करके जलेश सिंह को भेजा गया है। जिन पर तत्काल जांच कर पुष्टि करने की आवश्यकता है। दोषी अधिकारी को बचाने की मंशा से विलम्ब से एफ आईआर करने व अभी तक दोषियों का अभी तक खुला घूमना पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
अक्षय गिरी का जैलेश सिंह से क्या सम्बन्ध
थाना लवन क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बनगबौद का निवासी अक्षय गिरी पेशे से कुख्यात शराब कोचिंया है तथा अपने गांव में कच्ची माल की मिनी फैक्ट्री चलाता है व लाखों की अवैध कमाई करता है। पूर्व में अवैध शराब विक्रय के मामले में जेल भी जा चूका है। अक्षय गिरी का आबकारी अधिकारी जैलेश सिंह से गहरा सम्बन्ध है। परन्तु ये सम्बन्ध किसी रिश्तेदारी या नातेदारी का नहीं बल्कि अवैध उगाही व कमीशनखोरी का है। अक्षय गिरी का जैलेश सिंह के साथ उठना बैठना एवं साथ में कार्रवाही के लिए जाना तथा प्रभार क्षेत्र के अन्य कोचिंयो को पकडऩा, मारना पीटना डराना धमकाना और उनसे बड़ी धनराशि वसूल कर जैलेश सिंह को देने का काम करता है। इसी कारण दोनों का सम्बन्ध बहुत गहरा है। इसी एवज में वह जैलेश सिंह की सह में अपने गांव में खुलेआम कच्ची माल का निर्माण करता है व बिक्री करता है। आबकारी विभाग से सम्बन्ध का धौंस दिखाकर दबावपूर्वक क्षेत्र के कोचिंयों के पास अपना कच्ची माल बेचता है। जो लोग खुद महुआ शराब बनाते हंै या देशी विदेशी मंदिरा की बिक्री करते है उन्हें पकड़वाता है व सेटलमेन्ट करता है।
निष्पक्ष जांच की हो रही मांग
पत्रकारों पर हुई इस हमले पर राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पत्रकार संगठनों ने निंदा की है तथा निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाही की मांग कर रहे हंै। चुकि पुलिस की कार्यशैली से पता चलता है की उनके द्वारा शासकीय सेवक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए की अक्षय गिरी का हौंसला इसी कारण बुलंद है क्योंकि उनको उक्त अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। वह अपराध करने से पहले ही जानता है की उनको छुड़ा लिया जायेगा और जेल से बाहर आकर वह पुन: अवैधानिक कार्यों में संलिप्त होकर अपराध करेगा। पुलिस को चाहिए की समाज को अपराध मुक्त करने के लिए अपराध की जड़ तक जाये व सख्त से सख्त कार्रवाही करेें।

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