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पहाड़ी कोरवा समुदाय के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना में ठगी, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के सपनों का घर बना छलावा!

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जोहार छत्तीसगढ़-धरमजयगढ़़।

जनपद पंचायत धरमजयगढ़ अंतर्गत सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत कदमढोढ़ी के जोंकपानी मोहल्ले में निवासरत पहाड़ी कोरवा समुदाय के चार हितग्राहियों सिंघू राम कोरवा, नान्ही कोरवा, जयप्रकाश कोरवा एवं पंडरू कोरवा के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर कथित ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। हितग्राहियों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में पदस्थ सचिव मुरारीलाल पटेल के भाई श्रवण पटेल ने स्वयं को ठेकेदार बताकर गरीब हितग्राहियों को पक्का मकान बनवाने का भरोसा दिलाया। ठगबाज श्रवण पटेल ने को बोला कि तुम लोग स्वयं घर नहीं बनवा पाओगे, इसलिए योजना की राशि हमे दे ताकि घर बनाकर दे सकूं। इसके बाद कथित रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना की तीनों किश्त की राशि बैंक से निकलवाकर अपने पास रख लिया। इतना ही नहीं, हितग्राहियों ने बैंक पासबुक भी अपने पास रख लेने का आरोप लगाया गया है। लेकिन बड़ी विडंबना यह है कि जिन परिवारों को योजना के तहत पक्का आवास मिलना था, वे आज भी टूटी-फूटी झोपडिय़ों में जीवन बिताने को मजबूर हैं। हितग्राहियों का कहना है कि न तो आज तक घर बनकर तैयार हुआ और न ही उनकी राशि वापस लौटाई गई। और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में इन आवासों को 23 फरवरी 2024 को पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत तस्वीरों में साफ दिखाई दे रही है। कही महज एक फीट अधूरी दीवारें खड़ी है तो कहीं सिर्फ नींव और मलबा नजर आ रहा है, आप चित्र में देख सकते हैं। लेकिन वहीं मामले में ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि आवास निर्माण पूर्ण होने का सत्यापन पंचायत सचिव द्वारा ही किया जाता है। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि सचिव मुरारीलाल पटेल और उसके भाई श्रवण पटेल ने मिलकर योजना की राशि हड़पने का खेल रचा और राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा समुदाय के अधिकारों के साथ छल किया। वहीं गरीबी और अभाव में जीवन गुजार रहे कोरवा परिवार अब न्याय की आस लगाए बैठे हैं। शासन की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसका उद्देश्य गरीबों को सिर पर छत देना है, वही योजना अब भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोपों में घिरती नजर आ रही है। गांववासियों का कहना है कि जब विशेष संरक्षित पहाड़ी कोरवा समुदाय तक को नहीं बख्शा गया, तो ग्राम पंचायत में अन्य विकास कार्यों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। आरोप है कि ग्राम पंचायत कदमढोढ़ी में जनकल्याणकारी योजनाओं का बंदरबांट कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब सवाल क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर गरीब कोरवा परिवारों के सपने यूं ही अधूरे रह जाएंगे?

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